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उदय प्रताप सिंह, नईदुनिया, इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पेयजल में पाया गया कोलिफार्म बैक्टीरिया का खतरा केवल यहीं तक सीमित नहीं है। पिछले वर्ष फरवरी माह में शहर की पॉश शालीमार टाउनशिप को सप्लाई होने वाले नर्मदा के पानी में भी इसी बैक्टीरिया की उपस्थिति सामने आई थी। उसी समय टाउनशिप में 100 से ज्यादा लोग बीमार हुए थे। जांच में बैक्टीरिया मिलने पर रहवासी संघ ने पानी की टंकियों में ब्लीचिंग पाउडर डलवाया था। नर्मदा के पेयजल को लेकर यहां के रहवासी काफी सतर्क हैं और निर्धारित अंतराल पर पानी की जांच करवाते हैं।
हाल ही में सितंबर में रहवासी संघ द्वारा करवाई गई जांच में टोटल कोलिफार्म बैक्टीरिया तो नहीं पाया गया, लेकिन इसमें टोटल बैक्टीरिया काउंट, जो पेयजल में 10 से कम होना चाहिए, वह एक हजार गुना ज्यादा पाया गया। इससे स्पष्ट है कि नगर निगम सिर्फ भागीरथपुरा ही नहीं, शहर के कई इलाकों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। शालीमार टाउनशिप में करीब एक हजार परिवार रहते हैं और यहां की सोसायटी द्वारा नगर निगम को नर्मदा पेयजल के प्रतिमाह करीब साढ़े चार लाख रुपये के जलकर का भुगतान भी किया जाता है।
फिलहाल टाउनशिप के पानी की गुणवत्ता बेहतर है। नईदुनिया ने पेयजल विशेषज्ञ के साथ शालीमार टाउनशिप के नर्मदा जल की जांच की तो उसमें टीडीएस 122 मिला। विशेषज्ञ के मुताबिक यहाँ पर वर्तमान में सप्लाई हो रहा पानी पीने योग्य है और इसकी गुणवत्ता बेहतर है। भारत सरकार के पेयजल सुरक्षा विभाग के पूर्व नेशनल नोडल अधिकारी सुधींद्र मोहन शर्मा के मुताबिक फरवरी में इस टाउनशिप में नर्मदा पेयजल की जांच रिपोर्ट में टोटल कोलिफार्म बैक्टीरिया मिला था। उस समय पानी की टंकियों में ब्लीचिंग पाउडर डाला गया था।
सोसायटी के सदस्य ए. नंदकुमार के मुताबिक करीब एक साल पहले हमारी टाउनशिप के बाहर सड़क वाले हिस्से पर ड्रेनेज का पानी भर गया था। उस समय हमारे ड्रेनेज चैंबर भी ब्लॉक हो गए थे। उस दौरान टाउनशिप में नर्मदा पाइप लाइन का जो पानी सप्लाई हुआ वह दूषित था। साल भर में एक से दो बार गंदा पानी आता है। हम सोसायटी के ओवरहेड टैंक की सफाई करवाते हैं और निगम का नर्मदा पेयजल जो टाउनशिप में आता है, उसकी टेस्टिंग भी करवाते हैं। फरवरी की रिपोर्ट में पानी में टोटल कोलिफार्म बैक्टीरिया मिला था, इसलिए अभी भी हम हर दिन नर्मदा पानी की जांच कर रहे हैं।
सोसायटी के वाइस चेयरमैन मनोज व्यास के मुताबिक बारिश के समय हमारी टाउनशिप में नर्मदा का पानी गंदा आने की शिकायत हमेशा रहती है। अभी बॉम्बे हॉस्पिटल पानी की टंकी से पानी सप्लाई हो रहा है, इस वजह से अभी पानी में कोई खामी नहीं आ रही है। टाउनशिप के रहवासी व चिकित्सक डॉ. शिशिर गुप्ते के मुताबिक फरवरी में टाउनशिप में कोलिफार्म बैक्टीरिया मिला था, उस समय टंकियों में हाइपो क्लोराइड डाला गया था।
रहवासी योगेश साहू के मुताबिक पिछले वर्ष फरवरी में दूषित पानी के कारण टाउनशिप में 100 से ज्यादा लोग पेट दर्द और उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों के शिकार हुए थे। गनीमत है कि उस समय कोई गंभीर नहीं हुआ। हमने समय रहते पानी की खामी को पहचान कर सतर्कता रखी। निगम द्वारा दिया जाने वाला नर्मदा पाइप का पानी पर अब लोगों को विश्वास नहीं रहा है।
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