
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच करने वाले न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होगी या नहीं इसे लेकर अब 28 सितंबर को सुनवाई होगी। बुधवार को हाई कोर्ट की युगलपीठ के समक्ष मामले में सुनवाई होना थी, लेकिन समयाभाव में टल गई।
मामले की जांच कर रहे एक सदस्यीय आयोग ने 25 अगस्त 2026 को जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी थी। सीलबंद लिफाफे में पेश इस जांच रिपोर्ट के सार्वजनिक करने पर एक याचिकाकर्ता की ओर से आई आपत्ति के बाद कोर्ट ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी थी।
हालांकि कोर्ट ने यह व्यवस्था जरूर दी थी कि मामले से जुड़े अधिवक्ता इस रिपोर्ट का अवलोकन कर सकते हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट मनीष यादव, रितेश ईनाणी व अन्य ने रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग करते हुए आवेदन कोर्ट में प्रस्तुत किए हैं। इन्हीं आवेदनों पर बुधवार को बहस होना थी, जो टल गई।
रिपोर्ट भले ही अब तक सार्वजनिक नहीं हुई, लेकिन जिन अधिवक्ताओं ने इसका अवलोकन किया है उनके अनुसार रिपोर्ट के अंतिम 100 पेजों में सार है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जांच आयोग ने माना है कि अधिकारियों को वर्ष 2018 से जानकारी में था कि शहर के एक बड़े हिस्से में दूषित पानी सप्लाइ हो रहा है, बावजूद इसके उन्होंने लापरवाही की।
कोई प्रभावी सुधार नहीं किया। भागीरथपुरा के रहवासी सितंबर से लगातार गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। रिपोर्ट में नई पेयजल लाइन के टेंडर की प्रक्रिया में 20 माह की देरी का भी उल्लेख किया गया है।
यह बात भी जांच में सामने आई कि टेंडर स्वीकृति की फाइलें जानबूझकर लंबित रखी गईं। आयोग ने पेयजल और ड्रेनेज लाइन बिछाने में हुई गड़बडियों की ओर भी इशारा किया है और माना कि दोनों लाइनों के एक साथ बिछाने से पेयजल दूषित होने की स्थिति बनी। आयोग ने नगर निगम से पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था का काम लेकर अलग जल-मल बोर्ड गठित करने की सिफारिश भी की है।