
नईदुनिया, प्रतिनिधि, भोपाल। दूषित पानी के कारण इंदौर के भागीरथपुरा मोहल्ले में हुई मासूमों और बुजुर्गों की मौतों ने मध्य प्रदेश की नगरीय जलापूर्ति व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। शासन ने आनन-फानन में नई एसओपी तो जारी कर दी है, जिसमें 48 घंटे में लीकेज सुधारने और 20 साल पुरानी लाइनों को बदलने की बात कही गई है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी रूह कंपा देने वाली है।
नईदुनिया ने भोपाल शहर में ही इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि पेयजल आपूर्ति की 60 प्रतिशत पाइपलाइन बजबजाती नालियों और सीवर ढोने वाले नालों से होकर गुजर रही हैं। पेयजल पाइपलाइन में थोड़ी सी भी लीकेज इंदौर की त्रासदी को दोहरा सकती है। राजधानी भोपाल में जलापूर्ति का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। शहर में करीब 60 प्रतिशत पाइपलाइन आज भी नाले-नालियों के बीच से होकर बस्तियों तक पहुंच रही हैं। सालों पुरानी इन पाइपलाइनों में सालों से जंग लग चुकी है, जो न केवल पीने के पानी को दूषित कर रही है, बल्कि उन्हें बेहद कमजोर भी बना चुकी है।
वहीं, कई जगह तो वाल्व के ऊपर भी कचरा जमा हुआ है। ऐसे में जहां भी हल्का सा लीकेज होता है, वैक्यूम के कारण गंदा और जहरीला पानी सीधे घरों की टंकियों में पहुंचने खतरा बना रहता है। जिन टंकियों और पाइपलाइनों से करोड़ों लोगों की प्यास बुझती है, उनकी वर्षों से वास्तविक साफ-सफाई नहीं हुई है। कहीं, पेयजल की पाइप लाइन के ऊपर से ही सीवेज का गंदा पानी बह रहा है, तो कहीं वाल्व के ऊपर कचरे का अंबार लगा हुआ है।
सीएम हेल्पलाइन में दिसंबर माह में ही पेयजल से संबंधित 463 शिकायतें दर्ज कराई गईं हैं, यानी हर दिन औसतन 15 शिकायतें सिर्फ पीने के पानी को लेकर की गईं हैं। शिकायत करने के 50 दिन से भी अधिक समय बीतने के बाद भी तीन शिकायतें ऐसी हैं, जिनका समाधान नहीं हो सका है।
दिसंबर माह में पेयजल संबंधी शिकायतें - 463
समाधान हुआ - 187
कुल लंबित शिकायतें - 313
50 दिन से अधिक समय से लंबित - 03
यह भी पढ़ें- इंदौर जल त्रासदी एक चेतावनी, क्या पुरी और टोक्यो मॉडल से सीखेंगे हमारे शहर?
सवाल: नगरीय प्रशासन विभाग ने जो एसओपी जारी हुआ है उस पर क्या काम किया जा रहा है?
जवाब: एसओपी के आने से पहले से ही हमारी टीम टेस्टिंग कर रही है। आगे भी टेस्टिंग जारी रहेगी।
सवाल: वॉटर ट्रीटमेंट प्लान्ट की साफ-सफाई के नाम पर खाना पूर्ति की जा रही है?
जवाब: हमारे आंकड़ों के अनुसार तो सभी जगह वाटर ट्रीटमेंट प्लान्ट की साफ-सफाई की जा रही है, यदि कहीं खाना पूर्ति की गई है तो उसको दिखवाती हूं।
सवाल: शहर में कुछ जगह पेयजल पाइपलाइन के ऊपर से ही सीवेज का पानी बह रहा है?
जवाब: हां, ये बात सही है कि शहर में ऐसी कई जगह हैं, जहां पेयजल सप्लाई वाली पाइपलाइन के ऊपर से ही सीवेज का पानी बह रहा है। जहां भी पानी लीकेज हो रहा है, उसे ठीक करवाया जा रहा है।
सवाल: पेयजल पाइपलाइन के ऊपर से ही बहता सीवेज का पानी तो इंदौर जैसी घटना को आमंत्रण देना है?
जवाब: पाइपलाइन को बदलने में खर्च ज्यादा आएगा। इसके लिए ऐसी पाइपलाइन चिह्नित की जा रही है, जिन्हें बदलने के लिए प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा जाएगा।