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भोपाल में 'इंदौर' जैसी त्रासदी का साया, 60% पाइपलाइनें नालियों के बीच, 48 घंटे में लीकेज सुधारने की SOP जारी

Bhopal News: दूषित पानी के कारण इंदौर के भागीरथपुरा मोहल्ले में हुई मासूमों और बुजुर्गों की मौतों ने मध्य प्रदेश की नगरीय जलापूर्ति व्यवस्था पर गहरा स...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 03 Jan 2026 08:38:12 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Jan 2026 08:38:12 PM (IST)
भोपाल में 'इंदौर' जैसी त्रासदी का साया, 60% पाइपलाइनें नालियों के बीच, 48 घंटे में लीकेज सुधारने की SOP जारी
भोपाल में 60% पाइपलाइनें नालियों के बीच।

HighLights

  1. बजट के अभाव में 'जहरीले पानी' की सप्लाई
  2. पाइपलाइन बदलने के बीच 'खर्च' का रोड़ा
  3. हर दिन औसतन आ रही हैं 15 शिकायतें

नईदुनिया, प्रतिनिधि, भोपाल। दूषित पानी के कारण इंदौर के भागीरथपुरा मोहल्ले में हुई मासूमों और बुजुर्गों की मौतों ने मध्य प्रदेश की नगरीय जलापूर्ति व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। शासन ने आनन-फानन में नई एसओपी तो जारी कर दी है, जिसमें 48 घंटे में लीकेज सुधारने और 20 साल पुरानी लाइनों को बदलने की बात कही गई है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी रूह कंपा देने वाली है।

नईदुनिया ने भोपाल शहर में की पड़ताल

नईदुनिया ने भोपाल शहर में ही इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि पेयजल आपूर्ति की 60 प्रतिशत पाइपलाइन बजबजाती नालियों और सीवर ढोने वाले नालों से होकर गुजर रही हैं। पेयजल पाइपलाइन में थोड़ी सी भी लीकेज इंदौर की त्रासदी को दोहरा सकती है। राजधानी भोपाल में जलापूर्ति का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। शहर में करीब 60 प्रतिशत पाइपलाइन आज भी नाले-नालियों के बीच से होकर बस्तियों तक पहुंच रही हैं। सालों पुरानी इन पाइपलाइनों में सालों से जंग लग चुकी है, जो न केवल पीने के पानी को दूषित कर रही है, बल्कि उन्हें बेहद कमजोर भी बना चुकी है।


वहीं, कई जगह तो वाल्व के ऊपर भी कचरा जमा हुआ है। ऐसे में जहां भी हल्का सा लीकेज होता है, वैक्यूम के कारण गंदा और जहरीला पानी सीधे घरों की टंकियों में पहुंचने खतरा बना रहता है। जिन टंकियों और पाइपलाइनों से करोड़ों लोगों की प्यास बुझती है, उनकी वर्षों से वास्तविक साफ-सफाई नहीं हुई है। कहीं, पेयजल की पाइप लाइन के ऊपर से ही सीवेज का गंदा पानी बह रहा है, तो कहीं वाल्व के ऊपर कचरे का अंबार लगा हुआ है।

जमीन पर ऐसे हालात

  1. पेयजल पाइपलाइन के ऊपर से बह रहा सीवेज का पानी रवींद्र भवन के पास से बहने वाले नाले से पेयजल की पाइप लाइन निकल रही है। पूरा नाला गंदगी से भरा हुआ है। इसी पाइप लाइन के ऊपर से ही सीवेज का गंदा पानी भी बह रहा है। ऐसे में यदि यहां लीकेज होता है, तो पीने के पानी के साथ ही गंदा पानी मिल जाएगा। यहीं पर पानी का वाल्व भी है, जो कचरे से ढंका हुआ है, जिसमें से बदबू आ रही है। इस वाल्व में वैक्यूम बनने पर यह कचरा पानी को भी गंदा कर देगा।

  • नाले के बीच से निकल रही जंग लगी पाइपलाइन भारत माता चौराहा से भदभदा रोड़ वाले रास्ते पर भी गंदे पानी के नाले के बीच से ही पेयजल की पाइपलाइन डाली गई है। यह पाइपलाइन काफी पुरानी है, जिससे इस पर जंग भी लग चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इसको बदलने की मांग की जा चुकी है, लेकिन सिस्टम किसी हादसे का इंतजार कर रहा है।
  • सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर बदल दी तारीख नगर निगम के रिकार्ड में केवल तारीखें बदलकर 'खाना पूर्ति' की जा रही है। जेल पर बनी टंकी की साफ-सफाई की तारीख 28 दिसंबर 2025 की डाली गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वहां पिछले सप्ताह कोई साफ-सफाई नहीं हुई। यहां सिर्फ खानापूर्ति कर दिनांक बदला गया है। वहां जाने पर यह दिखता भी है। टंकी के पास बने वाल्व से भी पानी रिस रहा है, जिसके ऊपर एक कपड़ा डाला हुआ है। टंकी के बाउंड्रीवॉल के अंदर झाड़ियां उग आईं हैं, जो कि काटी नहीं गई।
  • हर दिन औसतन 15 शिकायतें

    सीएम हेल्पलाइन में दिसंबर माह में ही पेयजल से संबंधित 463 शिकायतें दर्ज कराई गईं हैं, यानी हर दिन औसतन 15 शिकायतें सिर्फ पीने के पानी को लेकर की गईं हैं। शिकायत करने के 50 दिन से भी अधिक समय बीतने के बाद भी तीन शिकायतें ऐसी हैं, जिनका समाधान नहीं हो सका है।

    सीएम हेल्पलाइन पर पेयजल संबंधी शिकायतों की स्थिति

    दिसंबर माह में पेयजल संबंधी शिकायतें - 463

    समाधान हुआ - 187

    कुल लंबित शिकायतें - 313

    50 दिन से अधिक समय से लंबित - 03

    यह भी पढ़ें- इंदौर जल त्रासदी एक चेतावनी, क्या पुरी और टोक्यो मॉडल से सीखेंगे हमारे शहर?

    भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन से सीधी बात

    सवाल: नगरीय प्रशासन विभाग ने जो एसओपी जारी हुआ है उस पर क्या काम किया जा रहा है?

    जवाब: एसओपी के आने से पहले से ही हमारी टीम टेस्टिंग कर रही है। आगे भी टेस्टिंग जारी रहेगी।

    सवाल: वॉटर ट्रीटमेंट प्लान्ट की साफ-सफाई के नाम पर खाना पूर्ति की जा रही है?

    जवाब: हमारे आंकड़ों के अनुसार तो सभी जगह वाटर ट्रीटमेंट प्लान्ट की साफ-सफाई की जा रही है, यदि कहीं खाना पूर्ति की गई है तो उसको दिखवाती हूं।

    सवाल: शहर में कुछ जगह पेयजल पाइपलाइन के ऊपर से ही सीवेज का पानी बह रहा है?

    जवाब: हां, ये बात सही है कि शहर में ऐसी कई जगह हैं, जहां पेयजल सप्लाई वाली पाइपलाइन के ऊपर से ही सीवेज का पानी बह रहा है। जहां भी पानी लीकेज हो रहा है, उसे ठीक करवाया जा रहा है।

    सवाल: पेयजल पाइपलाइन के ऊपर से ही बहता सीवेज का पानी तो इंदौर जैसी घटना को आमंत्रण देना है?

    जवाब: पाइपलाइन को बदलने में खर्च ज्यादा आएगा। इसके लिए ऐसी पाइपलाइन चिह्नित की जा रही है, जिन्हें बदलने के लिए प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा जाएगा।