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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bhopal Gas Tragedy Waste: विशेषज्ञ समिति के मार्गदर्शन में पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड कचरे की राख को करेंगे डिस्पोज

पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के कचरे की राख का निपटान दिसंबर तक किया जाएगा। यह प्रक्रिया कोर्ट द्वारा निर्धारित एक्सपर्ट कमेटी के मार्गदर्शन में होगी, जिसमें मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नीरी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कचरे को जलाने के दौरान हानिकारक तत्वों की जांच की गई और डायक्सीन फ्यूरान गैस की मात्रा की जांच के लिए सैंपल लिए गए।

By Udaypratap SinghEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 02 Jul 2025 10:08:42 AM (IST)Updated Date: Wed, 02 Jul 2025 10:26:53 AM (IST)
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Bhopal Gas Tragedy Waste: विशेषज्ञ समिति के मार्गदर्शन में पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड कचरे की राख को करेंगे डिस्पोज
पीथमपुर में भस्मक संयंत्र और वहां रखी राख।

HighLights

  1. पीथमपुर में जलाया गया था यूका का 337 टन कचरा।
  2. 55 दिन में 14 बार डायक्सीन फ्यूरान गैस की जांच हुई।
  3. लैंडफिल में दिसंबर तक इस राख का निपटान होगा।

उदय प्रताप सिंह, नईदुनिया, इंदौर। पीथमपुर के भस्मक संयंत्र में भोपाल गैस त्रासदी का 337 टन कचरा जलकर राख बन चुका है। अब पीथमपुर में ही ट्रीटमेंट, स्टोरेज, डिस्पोज फेसिलिटी (टीएसडीएफ) परिसर के लैंडफिल में दिसंबर तक इस राख का निपटान (डिस्पोज) किया जाएगा।

यह प्रक्रिया कोर्ट द्वारा निर्धारित एक्सपर्ट कमेटी के मार्गदर्शन में होगी। उक्त कमेटी में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

यूनियन कार्बाइड के कचरे को पीथमपुर में भस्मक संयंत्र में नष्ट करने के दौरान उसके चिमनी से निकलने वाले धुएं में हानिकारक तत्वों की जांच की गई। इसमें मर्करी, सल्फर डाइ आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड जैसी जहरीली गैसों के अलावा डायक्सीन फ्यूरान गैस की भी जांच की गई। डायक्सीन फ्यूरान गैस की निर्धारित से अधिक मात्रा मनुष्य के लिए नुकसानदायक होती है।


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डायक्सीन फ्यूरान की जांच की गई

बायो मेडिकल वेस्ट प्लांट, भस्मक संयंत्रों में वर्ष में एक बार अपने प्लांट की चिमनी से निकलने वाली गैसों में डायक्सीन फ्यूरान की जांच की जाती है। पीथमपुर के भस्मक संयंत्र का संचालन करने वाली एनर्जी एन्वायरो कंपनी ने यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने के दौरान 55 दिन में 14 बार (प्रत्येक सप्ताह में दो बार) डायक्सीन फ्यूरान गैस का सैंपल किया और इसे जांच के लिए गुरुग्राम की फेयर लैब में अलग-अलग समय के अंतराल पर भेजा गया।

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वहीं मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी डायक्सीन फ्यूरान की अलग से जांच की गई और 55 दिन में चार बार सैंपल कोलकाता की इफरैक लैब में जांच के लिए भेजे गए।

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गौरतलब है कि भस्मक संयंत्र की चिमनी से स्टैक मानीटरिंग किट के माध्यम से इस गैस के लिए सैंपल लेने की प्रक्रिया में आठ घंटे का समय लगता है। विज्ञानी व विशेषज्ञ खास हेलमेट व दस्ताने पहनकर किट के माध्यम से बोतलों में इसके सैंपल एकत्र करते हैं। देश में दो प्रमुख लैब में ही इसकी जांच की सुविधा है।

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