
नीरज व्यास, इंदौर। धार रोड स्थित जिला अस्पताल की इमारत 83 करोड़ की लागत से तैयार हो चुकी है, लेकिन विडंबना है कि जिस जगह पर यह इमारत बनी है उसका मालिकाना हक अब तक स्वास्थ्य विभाग के पास है ही नहीं। आज भी सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन सांची दुग्ध संघ के नाम पर दर्ज है।
इसे लेकर पूर्व में कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से कोशिशें की गई, लेकिन सब नाकाफी रही। विभाग की ओर से कई सालों के प्रयासों के बाद 300 बेड के अस्पताल की मंजूरी लेकर इमारत तो खड़ी कर दी है, लेकिन अब भी स्वास्थ्य विभाग के नाम पर जमीन होने के लिए सांची दुग्ध संघ की एनओसी का इंतजार है।
नया जिला अस्पताल तैयार होने के बाद भवन के लिए फायर सेफ्टी एनओसी लेने के साथ ही अन्य अनुमतियों के लिए जमीन के खसरे में स्वास्थ्य विभाग का नाम दर्ज होना जरूरी है। ऐसे में सिविल सर्जन ने इसे लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा के संज्ञान में सारा मामला लाया है। इसे लेकर कलेक्टर वर्मा ने नजूल विभाग को लिखा है और रिकॉर्ड खंगालना शुरू हुए हैं। इसके साथ अब जमीन विभाग के नाम पर होने के लिए कवायद फिर तेज होती दिख रही है।
सांची दुग्ध संघ के नाम पर दर्ज यह जमीन उस स्थिति में ही स्वास्थ्य विभाग के नाम पर हो सकती है जब सांची दुग्ध संघ की ओर से इसे लेकर एनओसी दी जाए। लंबे वक्त से एनओसी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन विभागीय तालमेल न बैठ पाने की वजह से एनओसी अब तक नहीं मिली है। साल 1988 तक वर्तमान जिला अस्पताल की जमीन पर सांची दुग्ध संघ संचालित होता था। इसकी कुछ जमीन का हिस्सा जीएसआइटीएस की मालिकी का भी था। इसके बाद से जमीन पर जिला अस्पताल तो निर्माण हो गया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में विभाग का नाम नहीं चढ़ सका। जानकारी के अनुसार सरकारी दस्तावेजों में जमीन पर मौके पर जिला अस्पताल है, लेकिन मालिकाना हक दुग्ध संघ के ही पास है।
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जिला अस्पताल की जमीन सरकारी रिकॉर्ड में स्वास्थ्य विभाग के नाम पर दर्ज होइसे लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। सांची दुग्ध संघ से एनओसी मिलने के बाद ही प्रक्रिया पूरी हो पाएगी। - डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत, सिविल सर्जन
मैं फिलहाल एक मीटिंग में हूं, इस मामले पर अभी कुछ नहीं बोल पाऊंगा। - रोहित मिश्रा, मैनेजर, सांची दुग्ध संघ