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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 03, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इंदौर में बोले सीए आनंद जैन :आडिट प्लान सही तरीके से किया जाए तो गलती की संभावना कम

एक अप्रैल से लागू हुए अकाउंटिंग और आडिटिंग संबंधित प्रावधानों पर हुआ सेमिनार का आयोजन, विशेषज्ञों ने कार्यक्रम को किया संबोधित।

By Hemraj YadavEdited By: Hemraj Yadav
Publish Date: Sun, 03 Apr 2022 12:51:36 PM (IST)Updated Date: Sun, 03 Apr 2022 12:51:36 PM (IST)
इंदौर में बोले सीए आनंद जैन :आडिट प्लान सही तरीके से किया जाए तो  गलती की संभावना कम

इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया (आइसीएआइ) की इंदौर सीए शाखा द्वारा 1 अप्रैल से लागू हुए कंपनी संबंधित बदलावों पर अकाउंटिंग एवं आडिटिंग अपडेट सेमिनार का आयोजन किया गया। ब्रांच के चेयरमैन आनंद जैन ने बताया कि आडिटर की भूमिका दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है साथ ही कई चैलेंज का उन्हें सामना करना पड़ता है। आजकल आडिटर को सिर्फ फाइनेंशियल आडिट ही नही बल्कि अन्य लॉ से संबंधित प्रावधानों के पालन पर भी कमेंट करना पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि आडिट की क्वालिटी आडिट पर दिए गए समय और उसकी प्लानिंग पर निर्भर करती है। आडिट प्लान यदि सही तरीके से बना कर कार्य किया जाए तो गलती की संभावना कम हो जाती है।

सेमिनार के मुख्य वक्ता सीए विक्रम गुप्ते ने बताया कि सीएआरओ- 2016 के बाद रिपोर्टिंग के फॉर्मेट में अमेंडमेंट कर सीएआरओ- 2020 लागू किया गया है। इस नए सीएआरओ में मुख्यतः कंपनी के कंप्लायंस संबंधी जानकारी, कंपनी की वित्तीय स्वास्थ्य एवं ऋण चुकाने की क्षमता, कारपोरेट गवर्नेंस संबंधी जानकारी तथा ग्रुप कंपनी से संबंधित व्यवहारों पर मुख्य रूप से ध्यान दिया गया है।


बेनामी संपत्ति पर जोर - नए किए गए बदलाव में मुख्य बदलाव में बेनामी प्रॉपर्टी से संबंधित मामलों पर जोर दिया गया। इसके अनुसार आडिटर को ऐसे सभी मामले जिनमें कंपनी द्वारा या तो कोई बेनामी संपत्ति खरीदी गई है या कंपनी द्वारा खरीदी गई कोई संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है या संपत्ति का सही स्वामी ज्ञात नहीं है। इन सभी मामलों में बेनामी घोषित की गई संपत्ति से संबंधित यदि कोई नोटिस कंपनी को आया है या कोई मामला बेनामी प्रॉपर्टी एक्ट के तहत पेंडिंग है तो उसके बारे में ऑडिटर को अपनी रिपोर्ट में जानकारी देना आवश्यक है। साथ ही कंपनी के द्वारा उनकी सब्सैडरी, ग्रुप कंपनी इत्यादि को दिए गए लोन का ब्योरा देना जरूरी है। उन्हें उस दिए गए लोन का अंतिम उपयोग भी देख कर उस पर रिपोर्टिंग करना होगी।

आडिटर को करना है कमेंट - इसके अतिरिक्त सभी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर को अपनी रिपोर्ट में यह बताना रहेगा कि कंपनी के द्वारा दिए गए लोन या एडवांस को उस एंटिटी द्वारा कहीं आगे फिर से लोन या एडवांस के रूप में तो नहीं दिया गया है, इस पर आडिटर को भी कमेंट करना है। कार्यक्रम का संचालन सचिव सीए रजत धनुका ने किया। आभार सिकासा चेयरमैन स्वर्निम गुप्ता ने माना। कार्यक्रम में पीड़ी नागर, दिनेश नागोरी, पुखराज बनंडी, संकेत मेहता, बीएम भंडारी आदि सदस्य शामिल हुए।