
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर को हनीट्रैप में फंसाने के मामले में क्राइम ब्रांच ने महिला आरोपितों के खिलाफ चालान तो पेश कर दिया, लेकिन पुलिस की जांच में कथित हनीट्रैप का सबसे अहम हथियार ही हाथ नहीं लगा। पुलिस ने आरोपित महिलाओं पर प्रतिष्ठित लोगों को जाल में फंसाकर वीडियो बनाने और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है, लेकिन जिस खुफिया कैमरे से रिकॉर्डिंग किए जाने की बात सामने आई थी, वह बरामद नहीं हो सका।
एक महिला आरोपित से पुलिस सिर्फ कैमरे का चार्जर ही जब्त कर पाई। मामले में पुलिस ने कथित आपत्तिजनक वीडियो और रिकॉर्डिंग को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना था। हालांकि, जिस मोबाइल में यह सामग्री होने का दावा किया गया, वह भी पुलिस के हाथ नहीं लगा। आरोपी ने पूछताछ में मोबाइल सिरपुर तालाब में फेंकने की बात कही है।
ऐसे में वीडियो की मूल डिवाइस और रिकॉर्डिंग, दोनों की बरामदगी नहीं हो पाई। पुलिस ने चिंटू का एडिटेड फोटो जब्त करने का दावा किया है। इसके बावजूद क्राइम ब्रांच ने गवाहों के कथन, आरोपितों और फरियादियों के बयानों तथा उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर चालान न्यायालय में पेश कर दिया है।
अब मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस कैमरे से कथित हनीट्रैप की रिकॉर्डिंग हुई, वह कहां है और जिस मोबाइल में वीडियो होने का दावा है, वह बरामद हुए बगैर पुलिस का आरोप अदालत में कितना मजबूत साबित होगा? मामले की आगे की तस्वीर न्यायालय में गवाहों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद साफ होगी।
पुलिस ने प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा को भी आरोपित बताया है, लेकिन उसकी भूमिका भी स्पष्ट नहीं की है। उसका आरोपित अलका दीक्षित से संपर्क बताया गया है। हनीट्रैप में फंसाने वाली रेशू की गिरफ्तारी भी नाटकीय ढंग से शिप्रा पुल से दर्शाई गई है।
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