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इंदौर में मिड-डे मील खाने से बिगड़ी बच्चों की तबीयत, कढ़ी-चावल खाते ही 38 बच्चे बीमार

इंदौर के ग्राम सिंहाना के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में शनिवार दोपहर मिड-डे मील खाने के बाद एक साथ 38 बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया।

By prem jatEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 22 Aug 2026 08:52:08 PM (IST)Updated Date: Sat, 22 Aug 2026 10:06:55 PM (IST)
इंदौर में मिड-डे मील खाने से बिगड़ी बच्चों की तबीयत, कढ़ी-चावल खाते ही 38 बच्चे बीमार
कढ़ी-चावल खाते ही 38 बच्चों की बिगड़ी तबीयत।

HighLights

  1. कढ़ी-चावल खाते ही 38 बच्चों की बिगड़ी तबीयत
  2. फूड पॉइजनिंग की आशंका से इंदौर में सनसनी
  3. प्राथमिक उपचार के बाद सभी 19 बच्चे डिस्चार्ज

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। ग्राम सिंहाना के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में शनिवार दोपहर मिड-डे मील खाने के बाद एक साथ 38 बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। तीन चार बच्चों ने कढ़ी-चावल खाने के कुछ देर बाद पेट दर्द, चक्कर और सिरदर्द की शिकायत की, इसके बाद अन्य बच्चों भी चक्कर आने की बात कहने लगे। आनन-फानन में बच्चों को उपचार के लिए इंदौर के अरविंदों अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें से 19 बच्चों को भर्ती कर करीब सात घंटे निगरानी में रखा गया। शाम करीब साढ़े छह बजे सभी बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

बच्चों को परोसे गए थे कढ़ी-चावल

स्कूल में शनिवार को करीब 1:30 बजे बच्चों को कढ़ी-चावल परोसे गए थे। भोजन करने के कुछ समय बाद कई बच्चों ने एक साथ तबीयत खराब होने की शिकायत की। स्कूल प्रबंधन ने तत्काल परिजनों को सूचना दी और बच्चों को अस्पताल भेजा। बड़ी संख्या में बच्चों के एक साथ बीमार होने से शुरुआती तौर पर भोजन से फूड पॉइजनिंग की आशंका थी, लेकिन हॉस्पिटल में बच्चों की लगातार निगरानी और जांच सामान्य आने पर छुट्टी दे दी गई।


बच्चों का यह है कहना

रोजाना स्कूल में भोजन मिलता है, लेकिन आज जो कड़ी खाने को दी उसका स्वाद सही नहीं था। इसे खाने के बाद चक्कर आने लगे, लेकिन अब तबीयत ठीक है।चक्कर आने पर सर को जानकारी दी, इसके बाद कुछ अन्य बच्चों को भी यह समस्याएं होने लगी।- काजल केवट, छात्रा

स्कूल के दौरान कड़ी और चावल बच्चों को खाने को दिए गए थे। इसको खाने के कुछ देर बाद कुछ बच्चों को उल्टी हुई। अन्य बच्चों ने भी तबीयत खराब होने की बात कही।मेरो भी सर भारी हो रहा था। शिक्षकों को इसकी जानकारी दी तो सभी को हॉस्पिटल लाए, लेकिन अब सब अच्छा लग रहा है।- हेमलता चौहान, छात्रा

फूड पॉइजनिंग को नकारा

अस्पताल में चिकित्सकीय जांच और निगरानी के बाद डाक्टरों ने बच्चों में फूड पॉइजनिंग के स्पष्ट लक्षण नहीं पाए। सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं। डाक्टरों के मुताबिक एक बच्ची को पहले से ही तीन दिन से बुखार था। अन्य बच्चों की हालत भी सामान्य है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने स्कूल पहुंचकर भोजन और अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल लिए हैं। अब इनकी जांच से पता चलेगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की वजह भोजन था या कोई अन्य कारण।

यह भी पढ़ें- इंदौर में स्वाइन फ्लू का दूसरा मामला, 62 वर्षीय महिला निजी अस्पताल में भर्ती, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

रसोई से लेकर थाली तक जांच

जांच टीम यह भी पता लगाया जाएगा कि भोजन कहां और कैसे तैयार हुआ। स्कूल तक किस तरह पहुंचाया गया और बच्चों को परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं। स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर इंदौर में पहले भी सवाल उठ चुके हैं। जून में शिशुकुंज स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने के बाद प्रशासन ने स्कूल की रसोई सील कर जांच की थी।

जांच के दौरान किसी भी बच्चे में फूड पॉइजनिंग अथवा किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए हैं। एहतियात के तौर पर कुछ बच्चों को प्राथमिक जांच के लिए अरविंदो अस्पताल लाया गया था, जहां चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उन्हें सामान्य स्थिति में डिस्चार्ज किया जा रहा है। घटना के संबंध में भोजन एवं अन्य आवश्यक सामग्री के सैंपल लिए गए हैं।- डॉ. माधव प्रसाद हसानी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी