
कुलदीप भावसार, नईदुनिया, इंदौर। जनता को सुविधा देने के नाम पर बनाए गए शहर के 350 से ज्यादा बदहाल सुविधाघरों की हालत सुधारने के लिए नगर निगम अब नई कार्ययोजना तैयार करेगा। समय-समय पर इन सुविधाघरों का आडिट होगा, लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी भी तय होगी। आर्थिक दंड और विभागीय कार्रवाई तक की अनुशंसा की जाएगी।
नईदुनिया के अभियान ‘सुविधाघरों का स्वच्छता सर्वेक्षण’ में भी यह बात सामने आई है कि शहर के ज्यादातर सुविधाघरों में पानी की व्यवस्था तक नहीं है। सुविधाघरों में वाश-बेसिन तो लगे हैं, लेकिन पानी और नलों की टोंटियां दोनों गायब हैं। सुविधाघरों में साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था नहीं है।
कई जगह तो हालत इतने खराब हैं कि गंदगी सड़क पर बहती रहती है। अब ऐसे सभी सुविधाघरों को सुधारा जाएगा। सुविधाघरों की छतों पर रखी टंकियों को पानी से भरा जाएगा। खराब हो चुकी पाइप लाइनों को भी सुधारा जाएगा।
सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए नईदुनिया ने शहरभर के सुविधाघरों का स्वच्छता सर्वेक्षण किया। कुछ प्रमुख स्थानों के सुविधाघरों की अव्यवस्था का उल्लेख करते हुए सचित्र समाचार भी प्रकाशित किए। सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि जिन लोगों के पास इन सुविधाघरों की व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही तरीके से नहीं कर रहे।
निगम शहरभर के सुविधाघरों के रखरखाव और व्यवस्था पर हर साल 10 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि खर्च करता है, बावजूद इसके न सुविधाघरों में पानी है न साफ-सफाई। अब जब नईदुनिया ने अभियान के माध्यम से इस अव्यवस्था की ओर ध्यान दिलाया है, नगर निगम नई कार्ययोजना तैयार करने में जुट गया है। निगम का प्रयास रहेगा कि सिर्फ स्वच्छ सर्वेक्षण के समय नहीं, बल्कि पूरे साल सुविधाघरों में पानी और सफाई की व्यवस्था बनी रहे।
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सुविधाघरों की व्यवस्था सुधारने के लिए नई कार्ययोजना तैयार करेंगे। स्वच्छता हमारी पहचान है और पूरे देश में इससे हमारी पहचान है। हमारा लक्ष्य नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा देना है। हम इस पर काम करेंगे। - पुष्यमित्र भार्गव, महापौर, इंदौर