इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । जलवायु परिवर्तन के कारण पर्वतीय बर्फ तेजी से पिघल रही है। हिमनद सिकुड रहे हैं और हिमालय और काराकोरम पर्वत श्रृंखलाओं में बार-बार पर्वतीय खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। यह बात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) इंदौर के डा. मोहम्मद फारूक आजम के एक शोध में सामने आई है। उन्होंने हिमालय- काराकोरम के ग्लेशियो- हाइड्रोलाजी के नए शोध में जलवायु परिवर्तन में हो रहे प्रभावों का अध्ययन किया। इसमें यह भी सामने आया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से उन पड़ोसी देशों में जल आपूर्ति प्रभावित हो रही है जो पर्वत श्रृंखलाओं में नदियों पर निर्भर हैं।

डा. मोहम्मद फारूक आजम आइआइटी इंदौर में सहायक प्रोफेसर है। उनका यह शोध साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। डा. आजम एक दशक से अधिक समय से हिमालय के ग्लेशियरों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की जांच कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक अरब से ज्यादा लोग पानी हिमालय और काराकोरम पहाड़ों में पिघलने वाले ग्लेशियरों से प्राप्त करते हैं। डा. आजम द्वारा किए गए शोध में यूएसए के प्लैनेटरी साइंस इंस्टीट्यूट के जेफ कारगेल और उत्तरी ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डा. जोसेफ शी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

डा. जोसेफ का कहना है कि 2050 तक ग्लेशियर का पिघलना, नदी अपवाह बढ़ने का अनुमान है। डा. आजम ने एक अन्य शोध लेख के सह-लेखक के रूप में भी योगदान दिया है। इसमें सात फरवरी को भारत के चमोली जिले में बड़े पैमाने पर भूस्खलन और बाढ़ की जांच की है। इसमें दो जल विद्युत संयंत्र नष्ट हो गए थे और दो सौ से अधिक लोग लापता या मृत हो गए थे। मलबे के प्रवाह के कंप्यूटर माडल का निर्माण करने के लिए उपग्रह इमेजरी, भूकंपीय रिकार्ड और प्रत्यक्षदर्शी वीडियो का विश्लेषण करने वाला यह शोध विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

Posted By: Sameer Deshpande

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