
नईदुनिया, विनय यादव, इंदौर। जहां एक ओर पूरा देश नववर्ष के स्वागत में खुशियां मना रहा है, वहीं इंदौर के भागीरथपुरा में नए साल की सुबह आंसुओं के साथ हुई। दूषित पानी से फैली बीमारी ने अब तक 5 माह के मासूम सहित 14 लोगों की जान ले ली है। जिन घरों में आज शुभकामनाएं गूंजनी थीं, वहां चिताओं की आग और सिसकियों की आवाजें हैं। नववर्ष इन परिवारों के लिए उम्मीद नहीं, बल्कि अपूरणीय दर्द लेकर आया है।
नववर्ष का पहला दिन: तारीख बदली, कैलेंडर बदला, लेकिन भागीरथपुरा के लिए हालात नहीं बदले। यहां नए साल की सुबह भी मातम के साए में डूबी रही। दूषित पानी पीने से बीमार पड़े लोगों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अभी भी सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त और बुखार से जूझ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण चिताओं की आग से नववर्ष की शुरुआत हुई।
सबसे दर्दनाक कहानी पांच माह के मासूम अव्यान की है। 10 साल की मन्नतों और इलाज के बाद जन्मा यह बच्चा नए साल की पहली खुशियां नहीं देख सका। पिता सुनील साहू और मां साधना साहू के लिए यह नववर्ष जिंदगी का सबसे काला दिन बन गया। दूध में मिलाया गया वही पानी, जिसने पूरे इलाके को बीमार किया, मासूम की मौत की वजह बना।
जीवनलाल बरेडे (80) की 28 दिसंबर को मौत हो गई। उनकी मौत दूषित पानी पीने के कारण हुई है; अभी परिवार के अन्य सदस्य भी अस्पताल में भर्ती हैं। बेटे आनंद ने कहा कि हमें ऐसा नववर्ष कभी नहीं चाहिए, लापरवाही के कारण मेरे पिता की मौत हो गई।
अशोकलाल पंवार (70) की 25 दिसंबर के बाद मौत हो गई। वह अपनी पत्नी के साथ रहते थे, लेकिन अब पत्नी अकेली रह गई है। दूषित पानी पीने के बाद उनकी हालत बिगड़ी और फिर मौत हो गई। स्वजन ने बताया कि साल हमारे लिए जिस दर्द के साथ शुरू हुआ, वह जिंदगीभर रहेगा।
भागीरथपुरा निवासी गोमती रावत की उल्टी-दस्त के बाद 25 दिसंबर को मौत हो गई थी। घर में बेटी रचना, पिता और भाई राहुल, रोहित, मुकेश रहते हैं, लेकिन तीनों अभी अविवाहित हैं। परिवार को संभालने का कार्य वही करती थीं। स्वजन ने बताया कि हम मां के बिना कैसे रहेंगे, वह हमेशा हमारे सपनों को पूरा करने का प्रयास करती थीं।
ताराबाई कोरी के बेटे ने बताया कि सोमवार सुबह 5.30 बजे मां की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके पहले मैं बाणगंगा से दवाई लाकर दी थी। हमें लगा कि सामान्य दस्त है और जल्द आराम मिल जाएगा। सोमवार को क्षेत्र में दवाएं बांटी जा रही थीं, हमने उन्हें वह दवाएं भी खिलाईं। लेकिन उनकी हालत बिगड़ गई और मंगलवार को घर पर उनकी मौत हो गई। हम तीन भाई और तीन बहन हैं; नववर्ष के पहले ही वह हमें छोड़ गईं।
भागीरथपुरा की बोरासी गली में मृतिका उर्मिला यादव के घर के पास ही एक लकवाग्रस्त पिता और तीन वर्षीय बेटी असहाय हालत में हैं। इनकी पत्नी कुंती पांच दिन से भर्ती हैं। बेटा है, लेकिन वह मां की देखभाल में अस्पताल में लगा हुआ है। घर के हालात यह हैं कि घर में खाने तक की व्यवस्था नहीं है। परिवार राह देख रहा है कि कोई उनकी मदद के लिए आगे आ जाए और कम से कम खाने की ही व्यवस्था कर दे।