
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: मध्य प्रदेश में यह पहली बार है जब दूषित पेयजल के कारण किसी एक सीमित क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में लोग एक ही बीमारी से एक साथ प्रभावित हुए हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त के मामलों ने कुछ ही दिनों में ऐसा रूप ले लिया, जिसे विशेषज्ञ महामारी जैसी स्थिति मान रहे हैं।
अब तक यहां 3200 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हैं। अस्पतालों में भर्ती से लेकर घर-घर इलाज तक, पूरा इलाका स्वास्थ्य संकट की चपेट में है। प्रदेश में इससे पहले उल्टी-दस्त के मामले तो सामने आते रहे हैं, लेकिन इतनी कम अवधि में इतने मरीज नहीं आए है।
इसी गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय और राज्य स्तर की विशेषज्ञ टीमें जांच में जुटी हुई हैं। यह टीमें क्षेत्र में पानी के सैंपल लेकर जांच कर रही है। इसके साथ ही बीमारी की शुरूआत से लेकर अभी तक की पुरी जानकारी एकत्रित कर रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भागीरथपुरा क्षेत्र में देश की प्रमुख स्वास्थ्य और अनुसंधान संस्थाओं की टीमें जांच और निगरानी कर रही है। कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलाजी, स्टेट इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (एसआईडीएसपी) और एम्स दिल्ली की विशेषज्ञों की टीमें करीब चार दिनों से क्षेत्र में पहुंचकर पानी के नमूनों, मरीजों की रिपोर्ट और अन्य पहलुओं की जांच कर रही हैं।
इन टीमों का उद्देश्य बीमारी के सटीक कारणों की पहचान, स्थिति नियंत्रण, भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसपर कार्य करना है। 15 दिन तक क्षेत्र में रहेगी टीम स्टेट सर्विलांस की टीम क्षेत्र में 15 दिन रहेगी। टीम यह सुनिश्चित करेगी की लोगों को अब शुध्द पानी मिलने लगा है। क्योंकि जब तक पानी शुध्द नहीं मिलेगा, तब तक मरीजों की संख्या कम नहीं होगी।
भविष्य में भी क्षेत्र में इसी तरह की समस्या बनी रहेगी। स्टेट सर्विलांस के प्रमुख डॉ. अश्विन भागवत ने बताया कि यह पहली बार है जब सीमित क्षेत्र में, इतने कम समय में इतनी संख्या में मरीज सामने आए है।