
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। यह पहली बार नहीं है जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विवादित बयान की वजह से चर्चा में हैं। इसके पहले भी वे कई मौकों पर ऐसे बयान दे चुके हैं जो न सिर्फ अमर्यादित थे बल्कि सुनने वाले को असहज भी कर देते हैं। दरअसल कैलाश विजयवर्गीय और विवादों का चोली-दामन का साथ है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से लगातार हो रही मौतों को लेकर बुधवार रात मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल को लेकर विजयवर्गीय ऐसे बिफरे कि उन्होंने अशोभनीय शब्दों का प्रयोग कर डाला। विजयवर्गीय इसके पहले भी महिलाओं, संस्कृति, युवाओं और सामाजिक आचरण को लेकर दिए गए अपने बयानों की वजह से विवादों में रहे हैं।
वे लगभग पांच दशक से सक्रिय राजनीति में हैं। वर्ष 1975 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। वर्ष 1983 में पहली बार पार्षद निर्वाचित होने के साथ ही उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई और वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बने। वे हरियाणा, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के प्रभारी भी रहे, लेकिन कभी उस स्थायी राजनीतिक मुकाम को नहीं पा सके जिसके वे संगठनात्मक अनुभव और सक्रियता के आधार पर हकदार माने जाते हैं। कई अवसर उन्हें मिलते-मिलते रह गए।
इसकी एक बड़ी वजह उनकी वक्त-बेवक्त की गई बयानबाजी भी है। भाजपा संगठन में अनुशासन और सार्वजनिक मर्यादा शुरू से ही प्राथमिकता पर रही है और विजयवर्गीय इसी कसौटी पर असफल हो जाते हैं। अपनी इसी 'सेल्फ गोल' करने की आदत की वजह से वे बार-बार हाशिए पर चले जाते हैं।
विदेशी संस्कारों पर टिप्पणी (सितंबर 2025): शाजापुर में उन्होंने कहा, "ये विदेश के संस्कार हैं। हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं, पुराने जमाने में लोग अपनी बहनों के गांव का पानी तक नहीं पीते थे, लेकिन आज के हमारे प्रतिपक्ष के नेता अपनी बहन का चौराहे पर चुंबन कर लेते हैं।"
महिलाओं के पहनावे पर राय (जून 2025): इंदौर में उन्होंने कहा, "मुझे कम कपड़े पहनने वाली लड़कियां पसंद नहीं। कई लड़कियां सेल्फी खिंचवाने आती हैं तो मैं कहता हूं बेटा पहले अच्छे कपड़े पहन के आना फिर खिंचाना।"
शूर्पणखा से तुलना (अप्रैल 2023): हनुमान जयंती पर उन्होंने कहा, "लड़कियां भी इतने गंदे कपड़े पहन के निकलती हैं कि उनमें देवी का स्वरूप नहीं दिखता, शूर्पणखा लगती हैं।"
मर्यादा और सीता हरण (जनवरी 2013): दुष्कर्म की घटनाओं पर उन्होंने कहा था, "मर्यादा का उल्लंघन होता है, तो सीता हरण हो जाता है। लक्ष्मण रेखा को कोई भी पार करेगा, तो रावण सामने बैठा है।"
महिला क्रिकेटरों को सलाह (अक्टूबर 2025): इंदौर में उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को बाहर निकलते समय स्थानीय अधिकारियों को सूचित करना चाहिए, यह एक सबक है।
आजादी पर विवादित बोल (अगस्त 2025): इंदौर के मल्हारगंज में उन्होंने कहा, "15 अगस्त 1947 को हमें कटी-फटी आजादी मिली थी। एक दिन इस्लामाबाद पर तिरंगा फहराया जाएगा और तब अखंड भारत का सपना पूरा होगा।"
यह भी पढ़ें- उज्जैन में चाइना डोर से नाबालिग बाइक सवार का गला कटा, हालत नाजुक