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खेतों में खिल रहा ‘सफेद सोना’, लेकिन कम भाव से किसानों में छाई मायूसी

MP News: खरीफ की फसलों की कटाई पूरी हो चुकी है। हालांकि सफेद सोने के रूप में जानी जाने वाली खरीफ की फसल कपास रबी सीजन तक खेतों में रहती है। इन दिनों ख...और पढ़ें

By Manoj BhadoriyaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 23 Nov 2025 09:31:58 PM (IST)Updated Date: Sun, 23 Nov 2025 09:31:58 PM (IST)
खेतों में खिल रहा ‘सफेद सोना’, लेकिन कम भाव से किसानों में छाई मायूसी
क्षेत्र के खेतों में खिल रही कपास की फसल।

HighLights

  1. खरीफ की फसल कपास रबी सीजन तक खेतों में रहती
  2. अच्छी पैदावार किसानों के चेहरे की चमक बढ़ी रही है
  3. आगामी दिनों में दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही

नईदुनिया प्रतिनिधि, आंबुआ। क्षेत्र में खरीफ की फसलों की कटाई पूरी हो चुकी है। हालांकि सफेद सोने के रूप में जानी जाने वाली खरीफ की फसल कपास रबी सीजन तक खेतों में रहती है। इन दिनों खेतों में कपास की फसल खिल रही है। अच्छी पैदावार किसानों के चेहरे की चमक तो बढ़ा रही है, मगर इस साल कम भाव होने से निराशा भी है। आगामी दिनों में भाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

कपास की बुवाई जून-जुलाई माह में खरीफ फसल के साथ की जाती है तथा यह फसल नवंबर-दिसंबर में तैयार होने लगती है। कपास के पौधों पर डोडे जब फूल के आकार में खिलते हैं तो खेत में चारों तरफ सफेदी ही सफेदी दिखाई देती है। कपास की फसल की बिनाई तीन चार बार तक होती है। प्रथम तथा द्वितीय बिनाई (तुड़ाई) में उच्च किस्म का कपास रहता है। इसके बाद फूल हल्का और छोटा होता जाता है। इन दिनों खेतों में कृषक परिवार तथा मजदूर कपास फूल की बिनाई करने में जुटे हैं।


भाव कम मिलने के कारण किसान मायूस

वर्तमान में 6500 रुपये क्विंटल के भाव कपास बिक रहा व्यापारियों के मुताबिक वर्तमान में 6500 रुपये क्विंटल के भाव कपास बिक रहा है, जबकि गत वर्ष यही कपास 75 से 85 रुपये प्रति किलो तक बिक गया था। भाव कम मिलने के कारण कृषक अभी कपास बेचने के बजाय घरों में एकत्र कर रहे हैं, ताकि जब भाव अच्छे मिलें तब इसे बेचें। अभी हाथ खर्च आदि के लिए थोड़ा-थोड़ा कपास (खेरची में) बेचा जा रहा है। कृषकों को उम्मीद है कि आगामी दिनों में भाव बढ़ेंगे।

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किसान बोले- दाम कम होने से अभी नहीं ले जा रहे बाजार

ग्राम मोटा उमर के कृषक अमरसिंह डुडवे ने बताया कि कपास की फसल की तुड़ाई (बिनई) प्रारंभ हो गई है। कपास की अच्छी किस्म आ रही है मगर भाव कम मिलने से मायूसी है। वहीं ग्राम अडवाड़ा के किसान नारायण सिंह चौहान कहते हैं कि बरसात के बाद कपास के फूल नवंबर माह तक खिलने लगते हैं, जिन्हें एकत्र करना प्रारंभ किया जाता है। अभी कपास एकत्र किया जा रहा है। गत वर्ष की तुलना में भाव कम होने से अभी बाजार में नहीं ला रहे हैं।

थोक अनाज क्रेता शेख मुल्ला मोहम्मद हुसैन बोहरा ने बताया कि इस सीजन में कपास के भाव पिछले वर्ष की तुलना में कम होने से कृषक अभी कम ही कपास बिक्री के लिए ला रहे हैं। भविष्य में अच्छे भाव की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसा होने पर किसानों की चिंता दूर होगी।