
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से नर्मदा की पाइप लाइन से घरों में गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा था। रहवासियों के अनुसार, वे लंबे समय से यह दूषित पानी पीने को मजबूर थे, जिसके कारण पिछले तीन दिनों से लोग उल्टी और दस्त की शिकायत लेकर अस्पतालों में भर्ती हो रहे थे। गंभीर स्थिति के बावजूद नगर निगम के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे। रविवार को जब स्थिति अनियंत्रित हुई और मरीजों की संख्या बढ़ी, तब जाकर निगम अमला सक्रिय हुआ, लेकिन शुरुआती तौर पर केवल जांच की खानापूर्ति की गई।
सोमवार सुबह जब क्षेत्रीय पार्षद ने बीमार लोगों की जानकारी निगम के उच्च अधिकारियों को दी, तब जाकर प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आई। दोपहर 11 बजे से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्र में मोर्चा संभाला और घर-घर जाकर पानी की टंकियों की जांच शुरू की। प्रभावित इलाके में क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस (ORS) के पैकेट बांटे गए। सोमवार दोपहर से देर रात तक अधिकारी और स्वास्थ्य दल क्षेत्र में तैनात रहे ताकि स्थिति को काबू में किया जा सके।
क्षेत्र में बीमारी फैलने का मुख्य कारण बुनियादी ढांचे की विफलता है। भागीरथपुरा में एलएंडटी कंपनी द्वारा नई नर्मदा पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन उससे जल प्रदाय शुरू नहीं हुआ है। इस कारण लोग सालों पुरानी सीमेंट की पाइप लाइन का पानी पीने को मजबूर हैं। पुरानी लाइन के पास अक्सर ड्रेनेज लाइन का लीकेज होता है, जो पेयजल में मिल जाता है और इसी वजह से घरों तक जहरीला पानी पहुंच रहा है।
नगर निगम की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस वार्ड 11 (जोन 4) में लोग बीमार पड़े, वह पेयजल संबंधी शिकायतों में पूरे शहर में दूसरे नंबर पर है। महापौर हेल्पलाइन 'इंदौर-311' के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह तक अकेले इस जोन में नर्मदा पेयजल से जुड़ी 111 शिकायतें पेंडिंग थीं। पूरे शहर के 22 जोन में कुल 1219 शिकायतें लंबित हैं, जिनमें से 837 शिकायतें पिछले सात दिनों से पेंडिंग हैं। अधिकारियों ने इन बढ़ते आंकड़ों को देखकर भी समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 85 नई शिकायतें आईं, जबकि पिछले तीन दिनों में 172 और सात दिनों में 837 शिकायतें लंबित रहीं। सबसे खराब स्थिति जोन 10, जोन 4 और जोन 11 की रही, जहाँ शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। भागीरथपुरा की इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और स्वच्छता के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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