
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: साइबर अपराधियों ने महाराष्ट्र के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रहे दया नायक का नाम लेकर इंदौर की 60 वर्षीय वृद्धा से 17 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने महिला को मनी लांड्रिंग और तस्करी के मामले में फंसाने की धमकी देकर डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस मामले में अपराध शाखा ने आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच शुरू कर दी है।
एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया के अनुसार, घटना दोपहर करीब दो बजे शुरू हुई। वृद्धा को एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने अपना नाम बृजेश कुमार बताते हुए खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताया। उसने सिम कार्ड बंद करने की धमकी दी और कहा कि महिला के नाम से एक और सिम कार्ड जारी हुआ है, जिसका दुरुपयोग हो रहा है और उससे बैंक खाते भी खोले गए हैं।
महिला द्वारा इन आरोपों से इनकार करने पर ठग ने कोलाबा (मुंबई) पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखवाने की बात कही और चेतावनी दी कि ऐसा नहीं करने पर पुलिस और सीबीआइ की टीम गिरफ्तार कर सकती है। इसके कुछ देर बाद दूसरे नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को इंस्पेक्टर आरती बताया। उसने कहा कि महिला के बैंक खातों का इस्तेमाल मनी लांड्रिंग और तस्करी में किया जा रहा है और इसके लिए ऑनलाइन जांच होगी।
इसके बाद तीसरा कॉल डीसीपी दया नायक के नाम से आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआइ में पदस्थ बताते हुए कहा कि वही महिला के खिलाफ मनी लांड्रिंग और तस्करी की जांच कर रहा है। उसने जांच में सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तारी की धमकी दी और किसी को भी इस बारे में न बताने की हिदायत दी।
ठगों ने महिला से बैंक खातों, जेवर, मकान, पारिवारिक पृष्ठभूमि और सदस्यों के बारे में विस्तृत जानकारी ली। महिला को वीडियो कॉल पर रखा गया और इस दौरान किसी से संपर्क करने पर रोक लगा दी गई। खातों के सत्यापन के बहाने पहले भाई के खाते में जमा तीन लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। इसके बाद चार लाख रुपये और एक अन्य खाते में जमा कराए गए। खेत बेचने से मिले पांच लाख रुपये नकद भी जमा करवाए गए।
इस तरह अलग-अलग खातों में कुल 17 लाख रुपये जमा करवाने के बाद आरोपितों ने मोबाइल फोन बंद कर लिए। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।