
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर से लेकर गांवों तक गिरते भूजल स्तर ने आने वाले दिनों में पेयजल संकट की आशंका बढ़ा दी है। सामान्य से काफी कम बारिश और भूजल के अंधाधुंध दोहन को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने पूरे इंदौर जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके साथ ही जिले में निजी और अशासकीय नलकूप खनन पर तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है।
यानी अब बिना अनुमति नए बोरिंग कराने वालों पर प्रशासन सख्ती करेगा। जिले में वर्षाकाल के दौरान अब तक 642.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से कम है। बारिश की कमी के बीच लगातार भूजल दोहन से पेयजल स्रोतों और नलकूपों का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है।
संभावित संकट से निपटने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और नगर निगम ने निजी बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की थी। इसके बाद कलेक्टर ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 और संशोधन अधिनियम, 2002 के तहत आदेश जारी किया।
प्रशासन ने प्रतिबंध के साथ सख्ती की तैयारी भी की है। अवैध रूप से नलकूप खनन या बोरिंग का प्रयास करने पर संबंधित मशीनें जब्त की जा सकेंगी। राजस्व, पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों को कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर दो हजार रुपये तक जुर्माना, दो साल तक कारावास या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
शासकीय योजनाओं के तहत होने वाले नलकूप खनन पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा। वहीं जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के लिए निजी नलकूपों और अन्य मौजूदा निजी जलस्रोतों का अधिग्रहण भी किया जा सकेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने यशवंत सागर और बिलावली जैसे तालाबों को नर्मदा के पानी से भरने की तैयारी भी की है। इस योजना पर कार्य किया जा रहा है। साथ ही अन्य तालाबों में भी पानी पहुंचाया जा सकता है। इन तालाबों से कुछ क्षेत्रों में पानी की सप्लाई होती है और आसपास का भूजल बना रहता है।
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