
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : वकील और राज्यसभा सदस्य उज्ज्वल निकम ने कहा कि युवाओं को अपनी मांगें कानून के दायरे में रहकर उठानी चाहिए। यह अवश्य देखना चाहिए कि आंदोलन कहीं अराजकता में न बदल जाए या राजनीतिक दल इसका गलत इस्तेमाल न कर लें। देश में युवाओं (जेन जेड) के प्रदर्शनों के बारे में निकम ने इंदौर में पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही।
मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब को फांसी की सजा दिलाने वाले उज्ज्वल निकम और उनकी पत्नी ज्योति निकम का गुरुवार को संस्था सार्थक की ओर से इंदौर के रवींद्र नाट्यगृह में सम्मान किया गया। इस मौके पर उन्होंने अपने लंबे कानूनी करियर के अनुभव साझा करते हुए 1993 के मुंबई बम धमाकों, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और 26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े कई अहम प्रसंग बताए।
निकम ने कहा कि समाज में कानून का डर होना चाहिए, लेकिन कानून लागू करने वाले अधिकारियों में ईमानदारी के साथ विनम्रता और इंसानियत भी जरूरी है। केवल ईमानदार होना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी अधिकारी के व्यवहार से इंसानियत खत्म हो जाए, तो उसकी ईमानदारी का महत्व भी कम हो जाता है। उन्होंने युवाओं को ईमानदार, स्पष्टवादी और विनम्र रहने की सलाह दी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग से संबोधित किया। इस दौरान निकम के जीवनवृत्त पर बनी फिल्म ‘प्रहार’ का प्रमोशन भी किया गया, जो शुक्रवार को सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कान्फ्रेंसिंग से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक केस में जीत हासिल कर निकम ने न्याय के प्रति देशवासियों की आस्था और विश्वास को और भी मजबूती दी। संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद निकम ने न केवल अपने नाम ‘उज्ज्वल’ को ‘सार्थक’ किया, अपितु न्याय सेवकों की भावी पीढ़ी (पब्लिक प्रासिक्यूटर्स) के लिए भी एक मानक स्थापित किया है।
कार्यक्रम में उन्होंने निकम को प्रदेश का दामाद कहकर भी संबोधिक किया, क्योंकि उनकी पत्नी ज्योति का घर धार जिले में आती है। संस्था के संस्थापक दीपक जैन (टीनू) ने कार्यक्रम की रुपरेखा बताया। यहां तक कि मंच भी उन्होंने संभाला। इस दौरान निकम के जीवनवृत पर बनी फिल्म ‘प्रहार’ के प्रमोशन भी किया गया, जो शुक्रवार को सिनेमाघरों में प्रकाशित की जाएगी। कार्यक्रम में सांसद शंकर लालवानी, भालू मोंढे, जीतू जिराती, राहुल सेठी भी मौजूद थे।
1993 के मुंबई बम धमाकों की जांच का जिक्र करते हुए निकम ने बताया कि पाकिस्तान ले जाए गए लोगों को इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सामान्य इमिग्रेशन प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ा था। उनके अनुसार, इन लोगों को सीधे एक अज्ञात गुप्त स्थान पर ले जाया गया, जहां उन्हें ट्रेनिंग दी गई।
निकम ने कहा कि पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर उन्होंने मुंबई पुलिस को महत्वपूर्ण सलाह दी थी। उनके मुताबिक कि टाइगर मेमन के कहने पर दाऊद इब्राहिम ने एक बैठक आयोजित करने का फैसला किया था। इसमें मुंबई से आठ लोग पाकिस्तान गए थे। वहां तीन अन्य व्यक्ति भी मौजूद थे, जिन्हें उन्होंने आईएसआई अधिकारी बताया।
भारतीय नागरिकों के पासपोर्ट पर सामान्य इमिग्रेशन मुहरें नहीं होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। निकम ने कहा कि उस समय पाकिस्तान से सीधे टकराने को लेकर काफी सावधानी बरती जाती थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में परिस्थितियां ऐसी थीं कि पाकिस्तान के खिलाफ सीधे कार्रवाई करने में डर महसूस किया जाता था, जबकि आज हालात पहले जैसे नहीं हैं।
26/11 मुंबई हमले के मामले पर चर्चा करते हुए निकम ने कहा कि उस समय लोगों में काफी गुस्सा था और सवाल उठ रहे थे कि कसाब का मुकदमा क्यों चलाया जा रहा है। इसके बावजूद निष्पक्ष सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी था।निकम ने बताया कि 26/11 हमले से पहले मुंबई की रेकी करने वाले डेविड हेडली की गवाही हासिल करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के सामने यह प्रस्ताव रखा था। अमेरिकी अदालत में हुई कानूनी प्रक्रिया के जरिए हेडली की गवाही दर्ज की गई, जिससे हमले की साजिश और उससे जुड़े कई पहलुओं को समझने में मदद मिली।
संजय दत्त से जुड़े मामले पर निकम ने कहा कि यदि हथियारों की मौजूदगी की जानकारी समय रहते पुलिस को दे दी जाती तो बड़ी घटना को रोकने और कई लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकती थी। बालीवुड की ओर से संजय दत्त के समर्थन में चलाए गए अभियान पर उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला आने से पहले किसी को निर्दोष घोषित करना न्यायपालिका पर दबाव बनाने जैसा हो सकता है। उन्होंने जोर दिया कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक अदालत की स्वतंत्रता और फैसले का सम्मान करना जरूरी है।
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