
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर जिले के गांवों में भी घर-घर कचरा उठाने की व्यवस्था होगी। जिले के सभी 610 गांवों को 56 क्लस्टर में बांटकर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जाएगी। कचरा घर से उठेगा, सुरक्षित तरीके से परिवहन होगा और इसके बाद वैज्ञानिक पद्धति से उसका प्रसंस्करण किया जाएगा। पूरी व्यवस्था सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल पर संचालित करने की तैयारी है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कार्य योजना को जल्द जमीन पर उतारने के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक कलेक्टर की अध्यक्षता में होगी। ग्रामीण क्षेत्रों की सफाई और जल संरक्षण को लेकर कई अहम फैसलों पर चर्चा हुई। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत गांवों में कचरा प्रबंधन का पूरा सिस्टम खड़ा करने की तैयारी है। अभी तक गांवों में कचरा निपटान की व्यवस्था एक समान नहीं थी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निपटान तक सिस्टम एजेंसी आधारित होगा। जो कचरा उठाने से लेकर उसके वैज्ञानिक निपटान तक सभी काम संभालेगी। विधायक उषा ठाकुर, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु प्रजापति सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने भूजल संरक्षण पर भी सख्ती दिखाई। उन्होंने जिले के सभी शासकीय भवनों में वाटर रिचार्जिंग अनिवार्य करने के निर्देश दिए। नए बनने वाले प्रधानमंत्री आवासों में भी रिचार्जिंग की व्यवस्था जरूरी होगी। यानी बारिश का पानी सीधे बहने के बजाय जमीन में उतारने की व्यवस्था की जाएगी।
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जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मार्च से जून तक जनभागीदारी से 2088 रूफ वाटर हार्वेस्टिंग और 309 रिचार्ज पिट बनाए गए। 373 कुओं और 481 हैंडपंपों का रिचार्ज किया गया। इसके अलावा 79 चेकडेम, स्टापडेम, 93 तालाब और 21 बावड़ियों का जीर्णोद्धार हुआ। छह नए तालाब बनाए गए, जबकि अमृत सरोवर योजना में पिछले वर्ष 101 नए तालाब तैयार किए गए।