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एडीजे कोर्ट के बारह फैसलों पर संदेह, फाइलें हुई जब्त; मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुरू की जांच

Indore ADJ Decisions: इंदौर जिला कोर्ट के एडीजे उमेश पटेल के कामकाज पर संदेह, शिकायत हाईकोर्ट पहुंची तो हलचल मची, कंप्यूटर से 12 फैसले अंग्रेजी में टाइप मिले।

By Mukesh MangalEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 03 Sep 2026 07:45:30 AM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 07:49:17 AM (IST)
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एडीजे कोर्ट के बारह फैसलों पर संदेह, फाइलें हुई जब्त; मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुरू की जांच
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ। - फाइल फोटो

HighLights

  1. एडीजे द्वारा फैसले अंग्रेजी में टाइप होने की जानकारी से संदेह शुरू हुआ
  2. जांच का अहम बिंदु- कंटेंट किस माध्यम से सिस्टम तक पहुंचा
  3. कंप्यूटर पर तैयार हुए या बाहरी कंप्यूटर से पेनड्राइव से ट्रांसफर किए गए

मुकेश मंगल, नईदुनिया, इंदौर। जब व्यक्ति बाहरी दुनिया और आपसी चर्चा से न्याय की उम्मीद छोड़ देता है, तब वह अदालत का रुख करता है। ऐसे में अदालत की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठें तो न्याय व्यवस्था में आम आदमी के विश्वास को लेकर चिंता स्वाभाविक है। ऐसा ही संदेह इंदौर जिला कोर्ट के एडीजे उमेश पटेल के कामकाज को लेकर सामने आया है।

इसकी शिकायत हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद शुरू हुई जांच ने न्यायिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है। जांच में उनके कंप्यूटर से 12 फैसले अंग्रेजी में टाइप किए हुए मिलने की जानकारी सामने आई है।

इन फैसलों को जांच के दायरे में लिया गया है। जांच टीम ने साइबर विशेषज्ञों की मदद से फैसलों को तैयार करने में इस्तेमाल किए गए कंप्यूटर भी पिछले दिनों जब्त किए हैं। एडीजे के फैसलों के अंग्रेजी में टाइप होने की गोपनीय जांच शुरू की गई। जबलपुर से प्रिंसिपल रजिस्ट्रार को पिछले सप्ताह इंदौर भेजा गया। उनके साथ जिला जज (विजिलेंस) को भी जांच में शामिल किया।


तकनीकी जांच के लिए पुलिस मुख्यालय से साइबर विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई। टीम ने कोर्ट के कंप्यूटर सिस्टम को खंगालकर उसमें मौजूद डिजिटल डेटा का परीक्षण किया। अब यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित फैसले कोर्ट के अधिकृत कंप्यूटर सिस्टम पर ही तैयार किए गए थे या उन्हें किसी बाहरी कंप्यूटर पर तैयार करने के बाद पेनड्राइव या किसी अन्य माध्यम से कोर्ट के सिस्टम में ट्रांसफर किया गया।

अंग्रेजी में फैसले टाइप होने से शुरू हुआ संदेह

एडीजे उमेश पटेल द्वारा कुछ फैसले अंग्रेजी भाषा में टाइप किए जाने की जानकारी सामने आने पर संदेह हुआ। हाई कोर्ट से भेजी टीम ने न्यायालयीन रिकार्ड के साथ संबंधित कंप्यूटर सिस्टम और उसमें उपलब्ध डिजिटल जानकारी की भी जांच की। तकनीकी मदद के लिए पुलिस मुख्यालय से संपर्क किया। इसके बाद तत्कालीन एडीजी (साइबर) ए. साईं मनोहर से चर्चा कर साइबर विशेषज्ञों की टीम की मदद ली गई।

विशेषज्ञों ने कंप्यूटर में मौजूद डेटा को सुरक्षित निकालकर उसका परीक्षण किया। जांच में लक्षित 12 फैसलों की फाइल हिस्ट्री, सिस्टम में उनकी एंट्री, तैयार होने का समय और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।

जांच का अहम बिंदु यह है कि फैसलों का कंटेंट किस माध्यम से कोर्ट के कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंचा। फैसलों की फाइलें किस कंप्यूटर पर तैयार हुईं, उन्हें किसने सिस्टम में डाला और पेनड्राइव या किसी अन्य स्टोरेज डिवाइस का इस्तेमाल हुआ या नहीं।

रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजी

जांच में शामिल जिला जज (विजिलेंस) राजीव अयाची के अनुसार मामला गोपनीय है। जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जानकारी देना उचित नहीं होगा। फैसलों की तकनीकी जांच के लिए संबंधित सिस्टम लैब भी भेजे गए हैं।

इन फैसलों का रिकॉर्ड जब्त

जांच के दायरे में लिए फैसलों में मेसर्स अंबर विरुद्ध मे. न्यूटन, वेल्निक इंडिया लि. विरुद्ध मे. किशोर शूट, वेल्निक इंडिया लि.विरुद्ध मे. अशोक कुमार, मे. अंबर विरुद्ध मेसर्स मीना, मे. किशन विरुद्ध मे.कोहीनूर, प्रताप सनेक्स विरुद्ध मेसर्स केबी इंडस्ट्रीयल, वेल्निक इंडिया विरुद्ध मालती इंडस्ट्रीज, मे. दमानी ब्रदर्स विरुद्ध मिस्टर सुरेश गुल्वानी व अन्य, प्रताप सनेक्स लि. विरुद्ध मे. अभिनव फूड, संपत इंटरनेशनल विरुद्ध सत्यम टी कंपनी, सांघी ब्रदर्स विरुद्ध चंद्रा प्रोटेको और डीपी भूषण लि. विरुद्ध हेमंत कटारिया शामिल हैं।

जांच के बीच एडीजे का तबादला

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एडीजे उमेश पटेल का इंदौर से बाहर तबादला कर दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर जांच में सामने आए निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जिला कोर्ट में पूर्व में भी फर्जी फैसले तैयार किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। तत्कालीन स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत और अमनसिंह भूरिया के खिलाफ आपराधिक प्रकरण में कार्रवाई हो चुकी है।

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