जब थानों में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं, तो वे जनता को कैसे सुरक्षा देंगे, MP हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
कोर्ट ने नेताओं के दबाव में पुलिस अधिकारियों द्वारा एकपक्षीय कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। वाहन चेकिंग के दौरान एक पुलिसकर्मी से मारपीट और उसकी वर्दी ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 08 Jan 2026 07:47:34 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Jan 2026 07:51:01 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट।HighLights
- वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस कर्मी से मारपीट व वर्दी फाड़ने के आरोप का मामला
- नेता के स्थान पर पीड़ित पुलिस कर्मी के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को दी गई चुनौती
- पूर्व महापौर प्रभात साहू सहित अन्य को नोटिस जारी, हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने जबलपुर के पूर्व महापौर प्रभात साहू व पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। मामला राजनीतिक दबाव में पीड़ित पुलिस कर्मी के ही विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर लिए जाने के रवैये को चुनौती से संबंधित है।
कोर्ट ने नेताओं के दबाव में पुलिस अधिकारियों द्वारा एकपक्षीय कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। वाहन चेकिंग के दौरान एक पुलिसकर्मी से मारपीट और उसकी वर्दी फाड़ने के मामले में उल्टे उसी पुलिसकर्मी के विरुद्ध एफआइआर दर्ज किए जाने को हाई कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही निरूपित किया।
जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब थानों में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम जनता को कैसे सुरक्षा देंगे।
यह भी सवाल भी उठाया कि वीडियो वायरल होने और पुलिस कर्मी की शिकायत से आरोपियतों की पहचान स्पष्ट होने के बावजूद नेताओं के नाम एफआईआर में क्यों नहीं जोड़े गए और मामला अज्ञात के विरुद्ध क्यों दर्ज किया गया।
हाई कोर्ट ने पूरे मामले को पुलिस विभाग का मनोबल गिराने वाला बताया। साथ ही आगामी सुनवाई में लार्डगंज थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर दोनों एफआइआर की केस डायरी पेश करने के निर्देश दिए हैं।