
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बैंक फ्राड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल आफिस ने रुचि ग्लोबल बैंक धोखाधड़ी प्रकरण में इंदौर पीएमएलए कोर्ट में आरोपित कंपनियों के कर्ताधर्ताओं के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। रुचि ग्लोबल लिमिटेड (अब एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड) पर 66 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले का आरोप है। ईडी ने कुल 21 आरोपी बनाए हैं, कोर्ट ने आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं।
ईडी ने सीबीआई भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मामला दर्ज कर 2002 में जांच शुरू की थी। जांच शुरू की थी। इंदौर की रुचि ग्लोबल लिमिटेड और उसके डायरेक्टर्स उमेश शाहरा, साकेत बरोडिया, आशुतोष मिश्रा व अन्य पर बैंकों के कंसोर्टियम से लोन हासिल कर उसकी हेराफेरी करने और बैंकों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
जांच में सामने आया कि रुचि ग्लोबल ने पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बडौदा और जम्मू एंड कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से करीब 66 करोड़ रुपये की नान-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधा (एलसी) धोखाधड़ी से ली। बाद में कंपनी ने अपनी ही सहयोगी फर्मों के पक्ष में एग्रो-कमोडिटीज खरीदने के नाम पर एलसी खुलवाईं। इसके लिए फर्जी दस्तावेज, जाली बिल आफ एक्सचेंज और फर्जी ट्रांसपोर्ट रसीदें (एलआर) बनाई गईं।
नेगोशिएटिंग बैंकों से इन बिलों को डिस्काउंट कराकर अपराध से अर्जित पैसों को शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए घुमाया गया और एक से तीन दिन के अंदर पैसा वापस रुचि ग्लोबल के खातों में ले आया गया। घाटा दिखाकर भुगतान नहीं करने के कारण बैंकों को 66 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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इससे पहले ईडी ने दिसंबर 2025 में प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 17 के तहत सर्च ऑपरेशन किया था। इसमें 23.50 लाख रुपये की नकदी जब्त की गई थी और बैंक खाते फ्रीज किए गए थे। इसके बाद 18 फरवरी 2026 को 5.13 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया गया था।
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