
लोकेश सोलंकी, नईदुनिया, इंदौर : मप्र का दवा उद्योग पर फिर सवालों के घेरे में हैं। दवा निर्यात के लिए दूसरे देशों की फर्जी एनओसी का सहारा लिया जा रहा है। उज्जैन और इंदौर की तीन दवा कंपनियों की ऐसी ही गड़बड़ी सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने पकड़ ली। इसके बाद तीनों कंपनियों के निर्यात पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इस मामले को खामोशी से दबा दिया भी दिया गया। आरोप लग रहे हैं कि कई कंपनियां वर्षों से ऐसी ही धांधली कर दवा निर्यात कर रही हैं। सेलवैल फार्मास्यूटिक्लस, दानिश हेल्थ केयर और सुपर फार्मूलेशंस नामक दवा कंपनियों के खिलाफ सीडीएससीओ ने यह कार्रवाई की है। सेलवैल कंपनी इंदौर के सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र में में स्थित है। जबकि दानिश हेल्थ केयर और सुपर फार्मूलेशंस दवा कंपनी उज्जैन में दवा निर्माण कर रही है।
इन तीनों ही कंपनियों ने बीते महीनों में भारत सरकार के सीडीएससीओ से दवा निर्यात के लिए अनुमति मांगी थी। ये कंपनियां अफ्रीकी देश अंगोला में दवा की खेप भेजना चाह रही थी। निर्यात अनुमति जारी करने से पहले सीडीएससीओ ने कंपनियों से तमाम दस्तावेजों के साथ दवा आयात कर रहे देश की एनओसी भी मांगी थी। इस पर कंपनियों ने अपने आवेदनों के साथ एनएओसी भी चस्पा की।
सीडीएसडीओ ने बाद में निर्यात अनुमति के साथ लगी इन एनओसी की अपने स्तर पर जांच करवाई तो अफ्रीकी देश अंगोला के सरकारी विभाग के नाम से जारी ये एनओसी फर्जी निकली।सीडीएससीओ ने इस पर कार्रवाई करते हुए तीनों ही कंपनियों की संबंधित दवा निर्यात पर एक साल के लिए पाबंदी लगा दी है।
भारतीय दवाओं पर बीते वर्षों में तमाम सवाल उठे थे। अफ्रीकी देश कैमरुन में तीन वर्ष पूर्व खांसी की दवा से बच्चों की मौत के मामले में भी इंदौर की दवा कंपनी का नाम सामने आया था। विदेश में हुए ऐसे मामलों के बाद केंद्र के औषधि नियामक ने निर्यात नियम कड़े कर दिए थे। पहले दवा कंपनियों को दवा निर्यात के लिए आयातक देश के कारोबारी के ऑर्डर के साथ दवा की रिपोर्ट और यहां से सरकार (सीडीएससीओ) की एनओसी की जरुरत होती थी।
बीते साल से नियम बना दिया गया कि निर्यात करने वाली कंपनी को उस देश की सरकार की भी एनओसी पेश करना होगी जो दवा आयात कर रहा है। इसी के बाद निर्यात की खेप भेजने की अनुमति जारी की जाएगी। नए नियमों के बाद निर्यात करने वाली कंपनियों ने अब जब आयातक देश अंगोला से जारी एनओसी लगाई तो सीडीएससीओ इंदौर के दफ्तर को शक हुआ।
दरअसल एक ही देश की एनओसी का प्रारुप तीनों कंपनियों के रिकार्ड में अलग-अलग था। इसके बाद सीडीएससीओ के इंदौर दफ्तर ने दिल्ली को लिखा। एनओसी की जांच शुरू हुई और संबंधित देश से रिपोर्ट मिली की ये एनओसी फर्जी है।
कार्रवाई के दायरे में आए दवा निर्माता अब कह रहे हैं कि गलती उनकी नहीं है।सेलवैल फार्मास्यूटिकल्स के संचालक कमल करमचंदानी ने नईदुनिया से कहा कि गलती हमारी नहीं है। हम तो वर्षों से ऐसे ही निर्यात कर रहे हैं। आयातक देश के एजेंट पर हमने भरोसा किया। उसने जो दस्तावेज दिए वो लगाए थे।
हमारी कंपनी का फॉर्मूलेशन वहां रजिस्टर्ड नहीं था। हमने तो फिर भी एक ही दवा की निर्यात अनुमति मांगी थी अन्य कंपनियों के तो कई तरह के फार्मूलेशन थे जिन पर कार्रवाई हुई। दूसरी ओर से इस मामले पर दानिश हेल्थकेयर के प्रमुख कासिम अली ने नईदुनिया से कहा कि हम इस मामले पर लगातार पत्राचार कर रहे हैं। सीडीएससीओ का भी सहयोग किया और हर जानकारी उपलब्ध कराई। कंपनी वर्षों से निर्यात कर रही है गलती हमारी नहीं है। दूसरी ओर उज्जैन के सुपर फॉर्मूलेशन के संचालक दिनेश जैन मामले पर चर्चा के लिए उलब्ध नहीं हुए।
सीडीएससीओ के नियम बिल्कुल स्पष्ट है। इंदौर से प्रकरण जांच के लिए मुख्यालय भेजा गया था। उसके बाद नियमानुसार कंपनियों पर कार्रवाई हुई है। इससे ज्यादा मैं कुछ बता नहीं सकता। -नवनीत सिंह, सीडीएससीओ इंदौर
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