
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : एक सितंबर से दूध के भाव बढ़ाने की मांग को लेकर दुग्ध उत्पादक किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को सांवेर तहसील के धरमपुरी स्थित विश्वनाथ धाम में दुग्ध उत्पादक संघ की बड़ी बैठक आयोजित हुई। जिसमें किसानों ने दूध के नए बिक्री भाव तय किए और यदि तय मांग के अनुसार भाव नहीं बढ़ाए गए तो आंदोलन किया जाएगा। किसानों ने तय किया कि तय मांग अनुसार दूध नहीं खरीदा गया तो दूध और सब्जी की सप्लाई रोक दी जाएगी।
दरअसल धरमपुरी में आयोजित बैठक में सांवेर, देपालपुर, महू, कनाड़िया और खुडैल तहसील के करीब पांच सौ किसान शामिल हुए। बैठक में किसानों ने तय किया कि अब भैंस का दूध 70 रुपए प्रति लीटर, गाय का दूध 60 रुपए प्रति लीटर और फैट के आधार पर दूध देने पर 12 रुपए प्रति फैट की दर से भुगतान लिया जाएगा।
किसान दिलीप सिंह और अरविंद सिंह राठौड़ का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं हुआ तो 1 सितंबर को इंदौर कलेक्टर कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो शहर में दूध के साथ फल और सब्जियों की सप्लाई रोकी जाएगी। वर्तमान में किसानों से 52 से 53 रुपये लीटर या 8.5 रुपये प्रति फैट के अनुसार दूध खरीदा जा रहा है।
किसान दिलीप सिंह का कहना है कि वर्तमान में उन्हें करीब 53 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध का भुगतान मिल रहा है, जबकि उत्पादन लागत 65 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। दूध के केन का परिवहन भाड़ा भी किसानों की जेब से लिया जा रहा है। वर्तमान में भैंस की कीमत डेढ़ लाख रुपये से ऊपर पहुंच गई है। खली 50 रुपये किलो, भूसा एक हजार रुपये क्विंटल और चूरी-चापड़ 30 रुपये किलो तक बिक रहा है। पशुओं के इलाज का खर्च अलग से लगातार बढ़ रहा है। कम बारिश ने हरे चारे की कमी ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।
किसानों ने बाजार में बड़े पैमाने पर नकली दूध, मावा, घी और पनीर बिकने का मुद्दा भी उठाया। किसानों का कहना है कि असली दूध पैदा करने वाला किसान घाटे में है, जबकि मिलावटी उत्पादों का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। नकली दूध और पनीर पर प्रशासन को कार्रवाई करना चाहिए।