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मकर संक्रांति, होली गए छह माह बीते, अब तक नहीं आई 500 खाद्य पदार्थों के नमूनों की रिपोर्ट, प्रदेशभर में यही स्थिति

फूड पॉइजनिंग और दूषित भोजन से लोगों के बीमार होने के मामले भी बढ़ रहे हैं। लेकिन चिंताजनक स्थिति है कि जनवरी से लिए गए करीब 500 खाद्य पदार्थों के सैंप...और पढ़ें

By Vinay YadavEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Fri, 03 Jul 2026 11:50:39 AM (IST)Updated Date: Fri, 03 Jul 2026 11:50:39 AM (IST)
मकर संक्रांति, होली गए छह माह बीते, अब तक नहीं आई 500 खाद्य पदार्थों के नमूनों की रिपोर्ट, प्रदेशभर में यही स्थिति
खाद्य पदार्थों के नमूनों की नहीं आई रिपोर्ट। (एआई इमेज)

HighLights

  1. मकर संक्रांति, होली त्योहार के दौरान बिकी मिठाइयों की जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई
  2. रिपोर्ट नहीं, कार्रवाई नहीं... मिलावटखोरों पर ऐसे कैसे लगेगी लगाम
  3. चिंताजनक स्थिति है कि जनवरी से लिए गए करीब 500 खाद्य पदार्थों के सैंपलों की जांच रिपोर्ट अब तक भोपाल स्थित राज्य प्रयोगशाला से नहीं आ पाई है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। खानपान के लिए प्रसिद्ध इंदौर में मिलावटखोरी तेजी से बढ़ रही है। यहां दूध, मसाले, घी आदि में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। फूड पॉइजनिंग और दूषित भोजन से लोगों के बीमार होने के मामले भी बढ़ रहे हैं। लेकिन चिंताजनक स्थिति है कि जनवरी से लिए गए करीब 500 खाद्य पदार्थों के सैंपलों की जांच रिपोर्ट अब तक भोपाल स्थित राज्य प्रयोगशाला से नहीं आ पाई है। इस बीच मकर संक्रांति, होली समेत अन्य त्योहार निकल गए, जिनमें बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री की बिक्री हुई।

यानी लोग जिस खाद्य पदार्थ का सेवन कर रहे हैं, उसकी शुध्दता की कोई गारंटी नहीं है। प्रशासन हमेशा दिखावें के लिए कार्रवाई करते हुए तो नजर आता है, लेकिन हकीकत यह है कि बिना जांच रिपोर्ट के मिलावटखोरों पर चालानी कार्रवाई तक नहीं हो पाती है।


हाल ही में शहर के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में खाना खाने के बाद 150 बच्चों के बीमार होने और छात्रावासों में बच्चियों के बीमार पड़ने जैसी घटना हुई। लेकिन खानपान में मिलावट थी या नहीं यह अब तक पता नहीं चल सका। जानकारी अनुसार यह स्थिति सिर्फ इंदौर की नहीं है, प्रदेश के लगभग सभी जिलों के 4000 से अधिक सैंपलों की जांच रिपोर्ट लंबित है।

लैब शुरू, लेकिन एनएबीएल प्रमाण पत्र के कारण नहीं हो पा रही जांच

इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तलावली चांदा में फूड लैब का लोकार्पण किया। लेकिन इसके बावजूद यहां लैब शुरू नहीं हो पाई है। क्योंकि अभी तक एनएबीएल प्रमाण पत्र नहीं मिला है। इसके बिना यहां होने वाली किसी भी जांच की रिपोर्ट मान्य नहीं होगी। अधिकारियों को अभी भी पता नहीं है कि एनएबीएल का प्रमाण पत्र कब आएगा। इंदौर के अलावा जबलपुर लैब का एनएबीएल प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है।

हर त्योहार बीतने के बाद ही आती है रिपोर्ट

खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट नियमानुसार 14 दिनों में मिल जाना चाहिए। लेकिन वर्षो से पुरे प्रदेश में यहीं व्यवस्था बनी हुई है कि महीनों तक जांच रिपोर्ट नहीं आती है। रक्षाबंधन, दीपावली जैसे बड़े त्यौहारों पर जब मिठाइयां बिक जाती है, त्यौहार चले जाते है फिर रिपोर्ट आती है। जबतक मिलावटखोर मिलावटी खाद्य पदार्थ बेच देते हैं, आम जनता उसका सेवन कर लेती है। कुछ माह बाद रिपोर्ट भी आ जाती है तो जुर्माने तक कार्रवाई सीमित रहती है। मिलावट कर लाखों रूपये का मुनाफा कमाने वाले मिलावटखोर हजारों रूपये का जुर्माना भर देते हैं।

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