
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : अपने बयानों से विवादों में रहने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर इंदौर में मीडिया को संबोधित करते हुए विवादित बयान दिए हैं। उनके इन बयानों के बाद एक बार फिर राजनीतिक घमासान सिर उठाने की आशंका है। यहां उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व का सनातन से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं कट्टरपंथी हिंदुओं के समूह ने घर-घर वैमनस्यता फैला दी है।
उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व का सनातन से कोई लेना-देना नहीं है। हिंदुत्व शब्द वेदों और पुराणों में नहीं है। अनादि मान्यता को छोड़कर लोग हिंदुत्व की तरफ जा रहे हैं। 1930 में सावरकर ने हिंदुत्व शब्द दिया था, उन्होंने कहा था ये हिंदुओ की पहचान है इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।
यह बात मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इंदौर में मीडिया को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि एक ओर हिंदुओं का कट्टरपंथी समहू है और एक ओर एआईएमआईएम ओवैसी, इन्होंने वैमनस्यता को घर-घर पहुंचा दिया है। ये विचारधारा हमारे संवैधानिक संस्थाओं चाहे इलेक्शन कमीशन हो, ज्यूडिशरी हो या शिक्षा, हर जगह कट्टरपंथी उन्माद फैलाने वाली ताकतों ने कब्जा कर लिया है।
राम मंदिर निर्माण को लेकर भी दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण में दीनानाथ वर्मा जी ने बताया कि 40 प्रतिशत अनिल मिश्रा को देना पड़ता है। ये मंदिर निर्माण कर रहे ठेकेदारों ने दीनानाथ वर्मा जी को बताया। दीनानाथ वर्मा जी ने चंपत राय को बताया तो दीनानाथ वर्मा जी की छुट्टी कर दी गई। राम मंदिर का निर्माण हो रहा था उस ऑफिशियल हैसियत से जॉइंट सेकेट्री होम ज्ञानेश कुमार भी ट्रस्टी भी थे।