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हाई कोर्ट की सख्ती के बाद जून 2026 को हुए गैस पाइप लाइन ब्लास्ट मामले में पार्षद बालमुकुंद सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज

इंदौर के विजय नगर क्षेत्र के सुमन नगर में 23 जून 2026 को हुए गैस पाइपलाइन ब्लास्ट मामले में पुलिस ने अंततः वार्ड 31 के पार्षद बालमुकुंद सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

By Kuldeep BhawsarEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 21 Jul 2026 09:29:14 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Jul 2026 09:30:07 PM (IST)
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद जून 2026 को हुए गैस पाइप लाइन ब्लास्ट मामले में पार्षद बालमुकुंद सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज

HighLights

  1. रिपोर्ट में भी पार्षद की भूमिका पर सवाल उठे थे
  2. घायलों को निश्शुल्क उपचार देने की मांग की गई है
  3. एफआईआर में निगम इंजीनियरों के नाम शामिल हो सकते हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। विजय नगर क्षेत्र के सुमन नगर में 23 जून 2026 को हुए गैस पाइपलाइन ब्लास्ट मामले में पुलिस ने अंततः वार्ड 31 के पार्षद बालमुकुंद सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मंगलवार को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान एसीपी पराग सैनी ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पार्षद को नोटिस जारी कर दिया गया है। हादसे में पार्षद की लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि उन्होंने मनमाने तरीके से और बिना अनुमति वाली जगह पर बोरिंग करवाई थी। इस कारण गैस लाइन में ब्लास्ट हुआ और चार लोग झुलस गए।


रिपोर्ट में भी पार्षद की भूमिका पर सवाल उठे थे

पार्षद की संलिप्तता की आशंका पहले दिन से जताई जा रही थी, लेकिन पुलिस कार्रवाई से बच रही थी। निगम की जांच रिपोर्ट में भी पार्षद की भूमिका पर सवाल उठे थे। कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब सुनवाई के दौरान हादसे में झुलसी युवती के स्वजन भी कोर्ट पहुंचे। उन्होंने बताया कि निश्शुल्क उपचार के आदेश के बावजूद शासन ने अभी तक 10 लाख रुपये जमा नहीं कराए हैं। इससे उपचार बाधित होने की आशंका है।

घायलों को निश्शुल्क उपचार देने की मांग की गई है

इस पर कोर्ट ने शासन से जवाब तलब किया है। सुमन नगर हादसे को लेकर दायर जनहित याचिका एडवोकेट रितेश ईनाणी ने दायर की है। याचिका में जिम्मेदारों पर आपराधिक केस दर्ज करने और घायलों को निश्शुल्क उपचार देने की मांग की गई है।

कोर्ट ने पहले ही हादसे में झुलसे लोगों का निश्शुल्क उपचार और गंभीर रूप से झुलसी युवती को अहमदाबाद भेजने के आदेश दिए थे। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी भी जताई थी। एसीपी सैनी ने बताया कि मामले में नगर निगम को पत्र लिखा गया है। इस बात की भी जांच हो रही है कि मौके पर देखरेख की जिम्मेदारी किस इंजीनियर की थी।

एफआईआर में निगम इंजीनियरों के नाम भी शामिल हो सकते हैं

एफआईआर में निगम इंजीनियरों के नाम भी शामिल किए जा सकते हैं। शासन नहीं दे रहा उपचार का खर्च कोर्ट को बताया गया कि युवती को एयरलिफ्ट कर अहमदाबाद तो भेज दिया गया है, लेकिन वहां 10 लाख रुपये का बिल बाकी है। सीएमएचओ ने कहा कि शासन को रिमाइंडर भेजा जा चुका है। इस पर याचिकाकर्ता एडवोकेट ईनाणी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर घायल को कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

निगम जांच में क्या आया सामने

नगर निगम की जांच में सामने आया कि पार्षद सोनी ने अपने स्तर पर बोरिंग मशीन मौके पर बुलवाई थी। सुमन नगर में जिस जगह रिचार्ज शाफ्ट के लिए बोरिंग हो रही थी, वह निगम की स्वीकृत स्थल-सूची में थी ही नहीं। मौके पर निगम का कोई अधिकारी या इंजीनियर मौजूद नहीं था। घटना के समय वहां केवल वेंडर, कर्मचारी और पार्षद ही थे। पार्षद ने ही जगह बताकर बोरिंग करवाई थी और कोई तकनीकी जांच भी नहीं की गई थी।

निगम जांच में सामने आईं चार बड़ी लापरवाहियां

बोरिंग निगम की स्वीकृत स्थल-सूची से बाहर कराई गई। पार्षद ने स्वयं बोरिंग मशीन बुलवाई और स्थान तय कराया। मौके पर निगम का कोई अधिकारी या इंजीनियर मौजूद नहीं था। बिना तकनीकी जांच के बोरिंग शुरू कर दी गई, जिससे गैस पाइपलाइन फट गई।

कोर्ट में क्या-क्या हुआ

एसीपी ने पार्षद पर एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी। पार्षद को नोटिस जारी किया गया। निगम इंजीनियरों की भूमिका की जांच जारी। घायल युवती के इलाज के लिए 10 लाख रुपये लंबित होने पर शासन से जवाब मांगा। अगली सुनवाई में अनुपालन रिपोर्ट पेश होगी।

23 जून को क्या हुआ था?

विजय नगर के सुमन नगर में रिचार्ज शाफ्ट के लिए बोरिंग के दौरान भूमिगत गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। पाइपलाइन से गैस रिसाव के बाद विस्फोट और आग लग गई। हादसे में चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें एक युवती की हालत सबसे गंभीर थी। गंभीर रूप से झुलसी युवती को बाद में एयरलिफ्ट कर अहमदाबाद के अस्पताल भेजा गया।

प्रारंभिक जांच में बिना तकनीकी अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना बोरिंग कराए जाने की बात सामने आई। इसके बाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई, जिसमें जिम्मेदारों पर आपराधिक कार्रवाई और घायलों के निश्शुल्क उपचार की मांग की गई।

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