
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर–राघौगढ़ ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) को प्रोजेक्ट पूरा करने में डेढ़ महीने और लगेंगे।
यातायात को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्माण किए गए हैं, जिनमें एक प्रमुख पुल, चार छोटे पुल और 19 व्हीकुलर अंडरपास बनाए गए हैं। अंडरपास के कारण स्थानीय लोगों और वाहनों को मुख्य सड़क पार करने में सुविधा मिलेगी। वहीं बायपास से सटे गांवों में आसानी से वाहनों की आवाजाही के लिए 27 जंक्शनों में रखे गए हैं।
26.6 किमी लम्बे इस कारिडोर की लागत 1 हजार 11 करोड़ रुपये है। 1 नवंबर 2022 से निर्माण कार्य शुरू हुआ। दो साल यानी 31 अक्टूबर 2024 तक सड़क बनाई जानी थी, लेकिन निर्माण एजेंसी की लापरवाही की वजह से प्रोजेक्ट को दो साल अधिक लग गए। बावजूद इसके एनएचएआइ के अफसर एजेंसी पर मेहरबान रहे।
प्रोजेक्ट लेट होने के बाद भी एजेंसी पर कोई कार्रवाई नहीं की है। यह कारिडोर इंदौर बायपास के एमआर-10 जंक्शन से राघौगढ़ स्थित नेमावर रोड तक बनाया गया है। ये सड़क हरदा से जुड़ेगी। इसके बाद इंदौर से हरदा और बैतूल होते हुए नागपुर के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे समय में भी काफी बचत हो सकेगी।
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ग्रीनफील्ड कारिडोर मार्ग के दोनों तरफ सर्विस रोड भी बनाई है। इसकी लंबाई भी 26 किमी रखी गई है। इससे बायपास से सटे गांव भी राजमार्ग से जुड़ सकेंगे, जिनमें बेगमखेड़ी, खुड़ेल खुर्द, गोगाखेड़ी और मिर्जापुर सहित 27 गांवों के लोगों को फायदा मिलेगा।
ग्रामीणों को गांवों, स्थानीय प्रतिष्ठानों और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए बेहतर रास्ता उपलब्ध होगा। एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव ने कहा कि राजमार्ग का काम अंतिम चरणों में पहुंच गया है। एजेंसी को काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।