
भरत मानधन्या, नईदुनिया, इंदौर। शहर में छह साल पहले तक औसतन साढ़े तीन सौ से चार सौ फीट की गहराई तक पानी उपलब्ध था, लेकिन आज आठ सौ फीट की गहराई में मिल मिल जाएगा, इसकी गारंटी नहीं है। यह हम नहीं कह रहे शहर में भूजल स्तर में आई इस गिरावट का खुलासा एसजीएसआइटीएस के इंडियन सोसाइटी फॉर रिमोट सेंसिंग (आइएसआरएस) के अध्ययन में हुआ है। सेंटर द्वारा इसरो से प्राप्त सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर भूजल की स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
अध्ययन में वर्ष 2019 की सैटेलाइट तस्वीरों से प्राप्त आंकड़ों को आधार बनाकर पुराने और नए चित्रों की तुलना की गई है। इसके अनुसार, वर्ष 2019 में शहर में भूजल की औसत गहराई करीब 350 से 400 फीट थी। वर्ष 2025 तक यह गहराई बढ़कर लगभग 750 फीट तक पहुंच गई, जबकि वर्ष 2026 में भूजल स्तर 800 फीट से भी नीचे जा चुका है।
यानी कुछ ही वर्षों में भूजल की गहराई लगभग दोगुनी हो गई है। अध्ययन में शहर के कुछ क्षेत्रों में भूजल की स्थिति औसत से भी अधिक खराब हो चुकी है। इन क्षेत्रों में करीब 1200 फीट से अधिक गहराई तक पानी की मौजूदगी नहीं मिलने की स्थिति सामने आई है।
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इस अध्ययन में हाई-रिजाल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी और स्पेक्ट्रल कैमरों से प्राप्त तस्वीरों का विश्लेषण किया गया था। इनमें हाई रिजोल्यूशन के साथ बड़ी मात्रा में डाटा होता है। इसके अलग-अलग एंगल और दी गई परिस्थितियों को समझकर विश्लेषण किया जाता है।एक तस्वीर की साइज 25 जीबी से अधिक होता है। इन तस्वरों का विशेष साफ्टवेयर की मदद से विश्लेष्ण किया जाता है।
सेंटर द्वारा सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से इंदौर की जलवायु और इसमें लगातार हो रहे परिवर्तन को समझने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में शहर के भूजल की स्थिति को समझने के लिए अध्ययन किया गया था। 2019 और 2026 की तस्वीरों के अध्ययन में यह स्थिति देखने को मिली है। सेंटर अन्य तस्वीरों पर भी काम कर रहा है - इंजीनियर विवेक तिवारी, मानद सचिव, इंडियन सोसाइटी फॉर रिमोट सेंसिंग