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इंदौर शहर के 50 बोरिंग के पानी में मिला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया, एनजीटी ने दिए जांच के निर्देश

इंदौर के अलग-अलग इलाकों के 50 निजी बोरिंग के पानी की जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने पर एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लिया है और नगर निगम व स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों को के पानी की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं।

By Udaypratap SinghEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 08 Nov 2026 12:06:49 AM (IST)Updated Date: Sun, 08 Nov 2026 12:06:49 AM (IST)
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इंदौर शहर के 50 बोरिंग के पानी में मिला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया, एनजीटी ने दिए जांच के निर्देश
इंदौर शहर के 50 बोरिंग के पानी में मिला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. पीने के पानी में जानलेवा बैक्टीरिया से हड़कंप
  2. एनजीटी ने जिम्मेदारों से मांगा जवाब
  3. निगम ने लगाए 'असुरक्षित पानी' के बोर्ड

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के अलग-अलग इलाकों के 50 निजी बोरिंग के पानी की जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने स्वत: संज्ञान लिया है और नगर निगम व स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों को बोरिंगों के पानी की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं।

नगर निगम ने लगाए 'असुरक्षित पानी' के बोर्ड

गौरतलब है कि शहर में 50 से ज्यादा सरकारी अस्पतालों, निजी छात्रावास, आवासीय क्षेत्रों और अन्य संस्थानों के बोरवेल के पानी की जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया पिछले दिनों मिला था। जांच रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम ने कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगा दिए थे और पानी को पीने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया था।


वहीं, कुछ जगहों पर बोरिंग को सील भी किया गया है।इस गंभीर मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की।

न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और सुधीर कुमार चतुर्वेदी (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम व मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन तथ्यों की जांच कर बोरिंग के पानी के उपचार के निर्देश दिए।

यह भी पढ़ें- भागीरथपुरा कांड में बड़ा खुलासा, अधिकारियों को 2018 से पता था सच, 600 पेज की जांच रिपोर्ट में खुली पोल

भागीरथपुरा में गंदे पानी से 36 लोगों की गई थी जान

गौरतलब है कि भागीरथपुरा में दूषित नर्मदा व बोरिंग के कारण 36 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले को लेकर पांच जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई की जा रही है। हाईकोर्ट द्वारा गठित एक सदस्यीय आयोग ने 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

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