
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : लोकायुक्त की छापामार कार्रवाई के बाद प्रधान आरक्षक फिरोज खान पर विभागीय कार्रवाई की गई है। पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी) की एसपी वाहिनी सिंह ने उसे निलंबित कर दिया है। फिरोज करीब एक साल से गैरहाजिर बताया जा रहा है।
एसपी ने उसकी लंबे समय से अनुपस्थिति को लेकर अलग से विभागीय जांच भी शुरू कराई है। उधर, लोकायुक्त पुलिस उसकी संपत्ति और बैंक खातों की पड़ताल में जुटी है। अब तक 22 खातों में से 17 का सत्यापन किया जा चुका है, जिनमें 10 लाख रुपये से अधिक की रकम मिलने की जानकारी सामने आई है।
फिरोज पुत्र फारुख खान का करीब एक साल पूर्व देवास से तबादला हुआ और वह पीटीसी आ गया। वह चालक के पद पर तैनात था। आमद देने के कुछ दिन बाद ही वह ड्यूटी से गैरहाजिर हो गया। इसके बाद से उसकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे थे।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद पीटीसी ने निलंबन की कार्रवाई की है। गैरहाजिरी के मामले में विभागीय जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि वह लंबे समय तक बिना अनुमति के अनुपस्थित कैसे रहा। सूत्रों के अनुसार फिरोज देवास में भी इसी तरह नौकरी करता था। पुलिस लाइन में पदस्थ अफसरों से सांठगांठ कर गैरहाजिर हो जाता था और विवादित जमीनों के सौदे करता रहता था। नोटिस मिलने पर बीमारी के दस्तावेज प्रस्तुत कर देता था।
फिरोज खान वर्ष 2002 में मंदसौर पुलिस में आरक्षक के पद पर भर्ती हुआ था। उसकी नौकरी का बड़ा हिस्सा देवास में बीतने की जानकारी है। चालक के पद पर रहते हुए वह खुद को प्रभावशाली पुलिस अधिकारी की तरह पेश करता था और जमीन के कारोबार में सक्रिय रहता था। उसने एक प्रमोटी आइजी के संरक्षण में नेटवर्क खड़ा किया था। रिटायर हो चुके आइजी उस वक्त उज्जैन में डीआइजी थे। फिरोज खान उस वक्त क्राइ ब्रांच में अटैच हुआ और खातेगांव और कन्नौद के जंगलों से सागौन की तस्करी करवाने लगा।
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