
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर नगर निगम प्रशासन ने वर्ष 2020 में समाप्त हो चुके कानून का हवाला देकर एक निजी अस्पताल से एक करोड़ 60 लाख रुपये की वसूली निकाल दी। राशि जमा नहीं करने पर भवन कुर्क करने और कार्रवाई के आदेश भी जारी किए गए। अस्पताल संचालक की याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
कोर्ट ने कहा कि यह जिम्मेदार अधिकारी की घोर अज्ञानता दिखाता है। बिना दिमाग लगाए यांत्रिक तरीके से आदेश पारित किया गया। इससे कोर्ट का कीमती समय बर्बाद हुआ और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट आना पड़ा। मामला गंगवाल बस स्टैंड के पास स्थित बाफना हास्पिटल का है। अस्पताल भवन अभी अधूरा है, लेकिन मार्च में इसे सील कर वसूली का नोटिस चस्पा कर दिया गया।
30 सितंबर को निगमायुक्त के हस्ताक्षर से 1.60 करोड़ रुपये जुर्माना चुकाने का आदेश जारी हुआ। याचिकाकर्ता के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि आदेश में जिन धाराओं का उल्लेख है, वे वर्ष 2020 में कानून से हट चुकी थीं। 27 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान निगम के वकील ने भी माना कि आदेश कानून की नजर में गलत है और उसे वापस लिया जा रहा है।
कोर्ट ने इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए राहत देने से इन्कार किया है। अदालनत ने कहा कि म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट की धारा 143, 146 और 153 वर्ष 2020 में समाप्त हो चुकी थीं। जुर्माने की राशि सात दिन में जमा करनी होगी। निगम कमिश्नर को 15 दिन में यह राशि दोषी अधिकारी से वसूलने का निर्देश दिया है।