
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इंदौर-देवास बायपास की बदहाली और इस सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों को लेकर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण वास्तविक स्थिति से बचने का प्रयास कर रहा है।
बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद उसके वकील सिर्फ याचिकाकर्ता के अधिकार और याचिका पोषणीयता पर बात कर रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग सड़क के रखरखाव को लेकर चल रही इस जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों का सामना करने से बच रहा है।
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की युगलपीठ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के इंदौर स्थित प्रोजेक्ट डायरेक्टर से कहा है कि वे सड़क से संबंधित शिकायतों का समाधान करें और अगली सुनवाई पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करें।
कोर्ट ने उनसे यह भी कहा है कि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बताएं कि भविष्य में इस सड़क का रखरखाव किस तरह किया जाएगा। कोर्ट ने इंदौर-देवास बायपास पर टोल वसूली को लेकर फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं किया है।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका मातृ फाउंडेशन ने एडवोकेट अमेय बजाज के माध्यम से प्रस्तुत की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दो आवेदन प्रस्तुत किए थे। इनमें से एक में कहा था कि इंदौर-देवास बायपास पर टोल वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए। क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस सड़क का सही तरीके से रखरखाव नहीं कर रहा है। सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।
ऊबड़-खाबड़ और फिसलन भरे रास्ते में जलभराव तथा जाम नालियां हैं। पुलों और पुलियाओं में दरारें हैं, सर्विस रोड पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं। अंडरपास की हालत भी अत्यंत जर्जर है। याचिकाकर्ता ने अपनी बात के समर्थन में फोटोग्राफ भी प्रस्तुत किए थे।
दूसरे आवेदन में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 अप्रैल 2026 को जारी दिशा-निर्देशों के पालन का आदेश देने की मांग की गई थी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता अंबिका प्रताप सिंह ने तर्क रखे थे। उनका कहना था कि यह याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था जो शुक्रवार को जारी हुआ। चार पेज के आदेश में कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के इंदौर स्थित प्रोजेक्ट डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से तलब करते हुए कहा है कि वे शिकायतों के समाधान के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करें और बताएं कि भविष्य में सड़क का रखरखाव किस तरह किया जाएगा। मामले में अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
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