आरएसएस और भाजपा के सैंकड़ों कार्यक्रम हुए, कितनी फीस ली गई: जीतू पटवारी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में 19 सितंबर को होने वाले राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा द...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 08:01:20 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 08:03:19 PM (IST)
HighLights
- बोले- किस विकास का दिया जलाएंगे
- अंग्रेजों के जमाने में भी ऐसा नहीं होता था
- कहा, एमपी में 30 हजार स्कूल घट गए
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में 19 सितंबर को होने वाले राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा दस लाख रुपये से अधिक फीस लेने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा सरकार की संकीर्ण सोच को दर्शाता है।
बुधवार को भोपाल में पत्रकार वार्ता के दौरान जब उनसे फीस विवाद पर पूछा गया, तो कहा कि कोई विवाद नहीं है और हम इस पर चर्चा भी नहीं करना चाहते। लेकिन राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, उनके कार्यक्रम की अनुमति को लेकर जो रवैया अपनाया गया, वह उचित नहीं है।
अंग्रेजों के जमाने में भी ऐसा नहीं होता था
अंग्रेजों के जमाने में भी ऐसा नहीं होता था। पटवारी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उनके कार्यक्रम के लिए भी फीस ली जाएगी। इसके पहले भी भाजपा अध्यक्ष विभिन्न कार्यक्रमों में आए हैं मगर कभी फीस नहीं ली गई।
दिग्विजय सिंह की सरकार में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष सहित भाजपा नेताओं के लिए तो भोज का आयोजन किया गया था, यह कांग्रेस के संस्कार बताता है।
किस विकास का दिया जलाएंगे
भाजपा के विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने कहा कि 17 सितंबर को सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वे कौन से विकास का दिया जलाएंगे? प्रदेश में विकास हुआ है क्या? यदि हुआ तो फिर बालाघाट में कुपोषण से बच्चों की मौत क्यों हो गई?
छिंदवाड़ा में जहरीले सीरप, सागर में जहरीली शराब से हुईं मौतें एवं रीवा व इंदौर के अस्पतालों की घटनाएं प्रदेशवासी भूले नहीं हैं।
एमपी में 30 हजार स्कूल घट गए
पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार भले ही शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करे मगर आंकड़े झूठी कहानी की पाेल खोल रहे हैं। 2014-15 से 2025-26 के बीच 30 हजार से अधिक स्कूल प्रदेश में घटे हैं। नामांकन दर भी कम है। 100 में से 32 बच्चे ही 12वीं कक्षा तक पहु्च पा रहे हैं।
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