
कपिल नीले, नईदुनिया, इंदौर। सिंहस्थ 2028 से पहले महू-खंडवा आमान परिवर्तन परियोजना का काम पूरा किया जाना है, लेकिन जंगल से गुजरने वाली पटरियां बिछाने को लेकर वन विभाग के सामने नया पेच खड़ा हो गया है। रेलवे लाइन के लिए बाधक पेड़ों की कटाई के बाद उनके ठूंठ हटाने और कटी हुई लकड़ी को डिपो तक पहुंचाने का काम इंदौर वनमंडल को मिला है।
इसके चलते अब पेड़ों की कटाई के बाद होने वाली सारी प्रक्रिया इंदौर वनमंडल को पूरी करना है। इसमें थोड़ा समय लग सकता है, क्योंकि वनमंडल ने इस काम का टेंडर निकाला है। एजेंसी तय होने के बाद काम शुरू किया जाएगा। इस वजह से प्रोजेक्ट पर असर पड़ सकता है।
156 किलोमीटर लंबी मीटरगेज रेल लाइन को ब्राडगेज में बदला जा रहा है, जिसमें 454 हेक्टेयर जंगल से लाइन गुजरेगी। इंदौर की 407 हेक्टेयर और खरगोन की 46 हेक्टेयर वनभूमि शामिल है। इसमें एक लाख 51 हजार पेड़ काटे जाने हैं, लेकिन रेल मार्ग में 20 किलोमीटर के क्षेत्र में 16 सुरंगें बनाई जाएंगी।
बड़िया से बेका के बीच 4.1 किमी, चोरल से मुख्तियार बलवाड़ा के बीच 2.2 किमी और राजपुर के पास 1.6 किमी लंबी सुरंगें होंगी। बाकी 12.1 किमी में 13 छोटी सुरंगें बनेंगी। इसके अलावा, 30-30 मीटर लंबे वायडक्ट (पुल) भी बनाए जाएंगे, जिससे 17 हजार पेड़ों को सुरक्षित रखा जाएगा। वैसे इन दिनों बलवाड़ा, बड़वाह और चोरल क्षेत्र में गिट्टी बिछाने, स्लीपर डालने और विद्युतीकरण का काम किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट के लिए बड़ी संख्या में पेड़ प्रभावित होंगे। अलग-अलग स्तर पर करीब एक लाख 34 हजार पेड़ काटे जाएंगे। रेलवे प्रशासन वन एवं पर्यावरण संबंधी आवश्यक स्टेज-2 स्वीकृति की प्रक्रिया में है। पहले वन विभाग की योजना थी कि निर्माण कार्य की जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से पेड़ों की कटाई की जाए, ताकि एक साथ बड़े क्षेत्र में पर्यावरणीय नुकसान न हो।
अब रेलवे ने 156 किलोमीटर के मार्ग पर छह प्रमुख साइट पर एक साथ काम करने पर जोर दिया है। इसके लिए छह से आठ महीने में पेड़ों की कटाई पूरी करने पर जोर दिया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि रेलवे के कुछ कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया होना बाकी है।
सबसे बड़ी परेशानी कटाई के बाद सामने आएगी। नियमानुसार पेड़ों की कटाई, ठूंठ हटाने और लकड़ी को डिपो तक पहुंचाने का काम वन विभाग की उत्पादन शाखा से कराया जाता है, लेकिन देवास और खंडवा की उत्पादन शाखाओं ने यह जिम्मेदारी लेने से इन्कार कर दिया है।
उनका कहना है कि परियोजना इंदौर और बड़वाह वनमंडल के क्षेत्र से जुड़ी है, इसलिए लकड़ी हटाने और डिपो तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित वनमंडल की होनी चाहिए। इसके लिए टेंडर निकाल दिए हैं। संभवतः नवंबर के बाद पेड़ों को काटने का काम किया जाएगा।
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पेड़ों की कटाई के बाद लकड़ियों को डिपो तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इंदौर वनमंडल के पास है, क्योंकि देवास और खंडवा उत्पादन शाखा यह काम नहीं कर रही है। इस काम के लिए टेंडर निकाले हैं। एजेंसी तय करने में थोड़ा समय लगेगा। हालांकि रेलवे ने अभी महू और चोरल साइट पर काम शुरू करने को लेकर प्लान बनाया है। - लाल सुधाकर सिंह, डीएफओ, इंदौर वनमंडल
रेल प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग दिल्ली से हो रही है। दिल्ली टीम और वन विभाग दोनों आपस में समन्वय कर रहे हैं। पटरियां बिछाने के बाद सेफ्टी और ट्रायल रन का काम रतलाम मंडल के पास रहेगा। - अश्विन कुमार, डीआरएम, रतलाम मंडल