
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : रीजनल पार्क के सामने लगने वाले थोक पटाखा मार्केट के जमीन के किराए की वसूली अब एक साल बाद इंदौर विकास प्राधिकरण को याद आई है। बीते साल लगे बाजार के लिए आईडीए ने पटाखा व्यापारी एसोसिएशन को रिकवरी का नोटिस जारी कर दिया है।
दो मैदानों के लिए बकाया किराए के रूप में एक करोड़ रुपये ज्यादा की मांग की गई है। व्यापारियों ने बीते साल की इस मांग पर लिखित आपत्ति लगाई है। सोमवार को इस मामले पर पटाखा व्यापारियों और आईडीए के अधिकारियों के बीच बैठक होना है।
राहुल गांधी के आयोजन छात्रों की गूंज के बाद रीजनल पार्क के सामने स्थित आईडीए के आधिपत्य वाला मैदान चर्चा में आया है। कांग्रेस को मैदान देने के लिए आईडीए ने भारी भरकम किराया लिया। इसके बाद सवाल उठा कि व्यवसायिक उपयोग के लिए भी किराया क्यों नहीं लिया जा रहा है?
कांग्रेस के सवाल और हिसाब के हेर-फेर में फंसने के डर से अब आईडीए के संपदा विभाग की ओर से पटाखा व्यापारियों पर बीते साल का बकाया निकाला गया है। दो मैदानों में दुकानें लगाई गई थी।
पटाखा व्यापारियों के अनुसार आईडीए ने जो नोटिस दिया है उसमें मां विहार कॉलोनी के पास स्थित पीछे के मैदान के लिए बकाया कुल 44 लाख रुपये की मांग निकाली गई है। जबकि रीजनल पार्क मुक्ति धाम के सामने स्थित मैदान के किराए के रूप में 62 लाख रुपये और मांगे गए हैं। जबकि बीते साल भी 4 लाख रुपये ज्यादा किराया लिया गया था।
बीते वर्ष के किराए की रिकवरी नहीं होने तक इस साल का डिमांड नोट भी जारी नहीं किया गया है। इस बीच मैदान पर मार्केट बनकर तैयार हो गया है। व्यापारी आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस के आयोजन को रोकने के लिए आइडीए ने भारी किराया तय किया था। अब राजनीति की इस रस्साकशी का शिकार व्यापारी बन रहे हैं। बीते वर्षों में कभी इतने किराए की मांग नहीं की गई। दो साल पहले तक तो जमीन का कोई किराया भी नहीं लिया जाता था।
थोक पटाखा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकर होतचंदानी के अनुसार आइडीए ने भारी भरकम बकाया निकाल दिया है। जबकि बीते साल जब मैदान किराए पर दिया था तब इतना किराया नहीं बताया गया था। व्यापारी सक्षम नहीं है कि इतनी ज्यादा मांग पूरी कर सके।
वैसे भी 2015 में पेटवाद कांड के बाद व्यापारियों को शहर के बीच से विस्थापित किया गया था। ऐसे में शासन की जिम्मेदारी है कि वे हमें जगह दें। हमने लिखित आपत्ति दायर कर दी है। इधर पटाखा व्यापारी एसोसिएशन की ओर से सिंधी कालोनी व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके ललित पारानी आईडीए के अधिकारियों के साथ किराए पर चर्चा और मोल-भाव में लगे हैं।
पारानी के अनुसार आईडीए के अधिकारियों ने कहा कि था कि उन्होंने हमें बीते साल नोटिस दिया। जबकि हमें बीते साल कोई नोटिस नहीं मिला। इस पर अधिकारियों के कहने पर हमने लिखित जवाब दिया है। हम रास्ता निकालने में लगे हैं कि दुकानों के क्षेत्रफल के हिसाब से हमसे किराया ले लिया जाए। पार्किंग की और खाली जगह का किराया नहीं लिया जाना चाहिए।