IIT Indore: नर्मदा नदी बेसिन के तलक्षट दूषित क्षेत्रों और कटाव वाले हाटस्पाट की पहचान करेगा आइआइटी इंदौर
IIT Indore: आइआइटी इंदौर और आइआइटी गांधीनगर संयुक्त रूप से नर्मदा नदी बेसिना का करेंगे अध्ययन। ...और पढ़ें
By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Wed, 06 Mar 2024 02:59:35 PM (IST)Updated Date: Wed, 06 Mar 2024 02:59:35 PM (IST)
आइआइटी इंदौर नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर IIT Indore। छह प्रमुख नदी घाटियों की सफाई व अध्ययन करने और प्रबंधन योजना तैयार करने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 12 शीर्ष तकनीकी संस्थानों के साथ समझौता किया है। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) इंदौर को भी शामिल किया गया है। इसके तहत आइआइटी इंदौर और आइआइटी गांधीनगर को संयुक्त रूप से 98,796 वर्ग किलोमीटर में फैले नर्मदा नदी बेसिन का व्यापक अध्ययन करने का कार्य सौंपा गया है। इस कार्यक्रम में आइआइटी इंदौर के प्रोफेसर एंड डीन मनीष कुमार गोयल के नेतृत्व में प्रोफेसर वर्ग की टीम ने भाग लिया।
राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (एनआरसीडी) योजना के तहत जल शक्ति मंत्रालय और 12 शैक्षणिक संस्थानों (आइआइटी, एनआइटी, और एनईईआरआइ) के बीच समझौता किया गया है। भारत सरकार ने नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, पेरियार, और महानदी के लिए नदी बेसिन प्रबंधन योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने के लिए संस्थानों के साथ समझौता किया है।
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आइआइटी कानपुर के नेतृत्व में सात आइआइटी के संघ द्वारा बनाई गई गंगा नदी बेसिन प्रबंधन योजना की सफलता के बाद किया गया है। इस समझौते को लेकर प्रो. गोयल ने कहा कि आइआइटी इंदौर एक विस्तृत जल बजट रिपोर्ट प्रदान करेगा और तलछट-दूषित क्षेत्रों और कटाव वाले हाटस्पाट की पहचान करेगा। साथ ही बाढ़ संभावित क्षेत्रों का पता लगाना, इससे संबंधी भविष्यवाणी करना, क्षेत्र में जलीय जैव विविधता का आकलन करने और उसे बनाए रखने के लिए उपायों और सुझावों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इसके अलावा क्षेत्र में मिट्टी, चट्टान और पानी की गुणवत्ता की उपलब्धता का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। वहीं, संस्थान एक उचित सीवरेज और जल निकासी नेटवर्क योजना और स्वच्छता मैपिंग प्रदान करेगा। साथ ही एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं की क्षमता और टिकाऊ जैविक
उपचार तकनीकों की संभावना का भी पता लगाया जाएगा।
समझौते पर इन संस्थानों ने किए हस्ताक्षर
महानदी नदी बेसिन का अध्ययन एनआइटी रायपुर और एनआइटी राउरकेला द्वारा किया जाएगा। वहीं, गोदावरी नदी बेसिन का अध्ययन आइआइटी हैदराबाद और एनईईआरआइ नागपुर द्वारा किया जाएगा। इसके साथ, कावेरी नदी बेसिन का अध्ययन आइआइएससी बेंगलुरु और एनआइटी त्रिची द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा पेरियार नदी बेसिन का प्रबंधन आइआइटी पलक्कड़ और एनआइटी कालीकट द्वारा किया जाएगा।