
कुलदीप भावसार, इंदौर : अल्पवर्षा ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रीष्मकाल अभी दूर है, लेकिन जलसंकट की आहट सुनाई देने लगी है। चिंता इस बात की है कि शहर के लगभग सभी तालाब सूखने की कगार पर हैं। जिनमें पानी है, वह ग्रीष्मकाल तक चलेगा इसकी उम्मीद कम ही है।
यशवंत तालाब को छोड़कर शेष तालाब शहर की जल-वितरण व्यवस्था में भले ही कोई भूमिका नहीं निभाते हैं, लेकिन इनके वर्षाकाल में लबालब होने का फायदा पूरे साल आसपास की सैंकडों कॉलोनियों को मिलता है। इन कालोनियों के हजारों बोरिंग पूरे साल इन तालाबों के पानी की वजह से रिचार्ज रहते हैं, पूरे साल पानी की आवश्यकता को पूरा करते हैं, जिसके चलते जलसंकट टल जाता है।
इस साल जब ये तालाब अक्टूबर में ही सूखने लगे हैं, आसपास की कॉलोनियों के हजारों बोरिंगों के दम तोड़ने की स्थिति बन गई है। सैकडों बोरिंग तो सूख भी चुके हैं। बोरिंगों की वजह से शहर को रोजाना करीब 200 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है। चिंता की बात तो यह है कि जिस दिन ये बोरिंग पूरी तरह से सूख गए उस दिन क्या होगा। अतिरिक्त 200 एमएलडी पानी कहां से आएगा।
इंदौर में लगभग एक लाख 30 हजार बोरिंग हैं। शहर का 30 प्रतिशत हिस्सा आज भी ऐसा है जहां नर्मदा लाइन है ही नहीं। इस हिस्से की सैंकडों कालोनियां पूरी तरह से बोरिंग के पानी पर आश्रित हैं। बोरिंगों के दम तोड़ते ही इन क्षेत्रों के रहवासियों की दिनचर्या पटरी से उतर जाती है। वर्तमान में शहर को नर्मदा से लगभग 430 एमएलडी पानी रोजाना सप्लाइ होता है। इसके अलावा 30 एमएलडी पानी यशवंत सागर से मिलता है। इस 460 एमएलडी पानी को 107 टंकियों के माध्यम से शहर के 70 प्रतिशत हिस्से में पहुंचाया जाता है। इस सप्लाइ को नियमित बनाए रखने के लिए नगर निगम ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
पिछले वर्ष ग्रीष्मावकाश में नगर निगम को जल वितरण व्यवस्था बनाए रखने के लिए 700 से ज्यादा टैंकरों का सहारा लेना पड़ा था। अल्पवर्षा की स्थिति और गर्मी के तेवर देखते हुए इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए 900 से ज्यादा टैंकरों की आवश्यकता होगी। नगर निगम ने 100 नए टैंकर खरीदने की तैयारी कर भी ली है।
जलसंकट की आशंका के चलते नगर निगम चार नई टंकियों का बचा हुआ काम तेजी से पूरा करेगा। ये टंकियां गोंदवले धाम, आजाद नगर, यूनिवर्सिटी परिसर और नवलखा क्षेत्र में बन रही हैं। इन टंकियों से चालू होने का लाभ यह मिलेगा कि वर्तमान में जिन क्षेत्रों में डायरेक्ट लाइन से सप्लाइ हो रहा है वहां सप्लाइ नियंत्रित की जा सकेगी। एक अनुमान के मुताबिक डायरेक्ट सप्लाइ बंद होने से रोजाना जो पानी बचेगा वह करीब तीन लाख जनसंख्या की जलापूर्ति के लिए पर्याप्त होगा।
जलसंकट को देखते हुए फलबाग में एक संपवेल भी तैयार हो रहा है। इसकी क्षमता लगभग 30 एमएलडी की होगी। इस संपवेल में जितना पानी स्टोरेज किया जा सकेगा उससे 12 बड़ी टंकियां भरी जा सकती हैं। आपात परिस्थिति में यह पानी शहर की प्यास बुझाने के काम आएगा।
इधर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के इंदौर प्रवास के दौरान उनसे मुलाकात कर शहर के लिए विशेष पैकेज की मांग की। महापौर ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से यशवंत सागर और बिलावली तालाब में जल संग्रहण बढ़ाने तथा नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना से जल उपलब्ध कराने के संबंध में चर्चा की।
उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि अल्पवर्षा की वजह से जलसंकट की आशंका को देखते हुए शहर की पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए शहर को 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज दिया जाए। उन्होंने नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना के माध्यम से यशवंत सागर तालाब को भरने तथा परियोजना की चैनल के माध्यम से बिलावली तालाब में जल पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
जलसंकट की आशंका के चलते हमने तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री से विशेष पैकेज की मांग के साथ-साथ टंकियों के बचे काम को तेजी से करने के निर्देश दिए हैं। उम्मीद है कि दिसंबर के अंत तक हमारी तैयारी पूरी हो जाएगी। हम जल संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाएंगे ताकि पानी का दुरुपयोग रोका जा सके। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर