
लोकेश सोलंकी, नईदुनिया, इंदौर : धार रोड पर सिरपुर तालाब के ठीक सामने स्थित बांक पंचायत क्षेत्र को सरकारी रिकार्ड में 100 प्रतिशत नल-जल वाला क्षेत्र घोषित किया गया है। जनवरी 2024 पंचायत ने प्रमाणित किया कि हर घर में नल से साफ पानी पहुंच रहा है।
जल जीवन मिशन के तहत काम पर करीब सात करोड़ रुपये खर्च किए गए। असलियत ये है पंचायत क्षेत्र के 60 प्रतिशत से अधिक घरों के नलों में मार्च 2024 के बाद से कभी पानी नहीं आया। धार रोड स्थित ग्रीन पार्क कालोनी के रहवासी और सेवानिवृत्त सेना अधिकारी सलीम खान तथा क्षेत्र के अन्य रहवासियों ने इसी महीने प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजी।
पत्र में कहा गया है कि उनकी कालोनी और पूरे पंचायत क्षेत्र को सरकारी रिकॉर्ड में हर घर में नल से जलापूर्ति होने की जानकारी दी जा रही है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, नलों में पानी केवल जल जीवन मिशन के परीक्षण के दौरान आया था। मार्च 2024 के बाद से पूरी कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र में नलों से पानी नहीं आया। नल कनेक्शन के लिए बिछाई गई लाइन भी अब टूट-फूट गई है। अब पंचायत सचिव कह रहे हैं कि हर पंचायत में ऐसा ही होता है।
बांक क्षेत्र में आबादी करीब 40 हजार आंकी जाती है। बांक पंचायत क्षेत्र इंदौर के शहरी क्षेत्र से सटा है लेकिन निगम सीमा क्षेत्र की कालोनी में खत्म होती है तो निगम पानी नहीं देता। दो बड़ी कॉलोनियां, ग्रीन पार्क और नूरानी नगर पंचायत के अधीन है । इन दोनों कॉलोनियों में जल जीवन मिशन के कामों की स्थिति से कथित गड़बड़ी साफ दिखती है।
क्षेत्र में घरों के बाहर नल के पाइप लगाकर काम पूरा दिखाया गया है। जहां खाली प्लाट हैं, वहां भी नल कनेक्शन लगाकर सरकारी रिकार्ड में संख्या बढ़ाई गई। जल जीवन मिशन के तहत पंचायत क्षेत्र की जवाहर टेकरी पर दस लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी बना दी गई।
योजना में पानी के स्रोत के तौर पर जो आठ बोरवेल भी दिखाए गए इनमें तीन-चार बोरवेल दशकों पहले जनप्रतिनिधियों ने करवाए थे। फिर से उन्हें इस योजना में शामिल दिखाया गया। ये बोरवेल मुख्य टंकी से दो-तीन किलोमीटर दूर हैं। स्थानीय सरपंच सोहराब पटेल और पंचायत सचिव जगदीश मेहता ने 100 प्रतिशत काम पूरा होने और हर घर में जलापूर्ति का प्रमाण-पत्र जारी किया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रमाण-पत्र देकर कागजी खानापूर्ति की गई और भुगतान भी करवा लिया गया।
हमारी योजना थी कि नर्मदा की टंकी से पानी मिल जाएगा तो पूरे क्षेत्र में पानी दिया जाएगा। पीएचई ने कनेक्शन दे दिए, लेकिन नर्मदा टंकी से पानी नहीं मिला। ऐसे में हम क्या कर सकते हैं? प्रमाण-पत्र पर पीएचई अधिकारियों ने जैसा कहा, हमने जारी कर दिया। -सोहराब पटेल, सरपंच
ये सिर्फ बांक पंचायत में नहीं है। जल जीवन मिशन में तो हर पंचायत में ऐसा ही हुआ है। पीएचई ने काम किया था। जब काम पूरा हुआ, तब मैं क्षेत्र में नया आया था। पहले मैंने प्रमाण-पत्र रोके थे। अधिकारियों का फोन आया तो मैंने हस्ताक्षर कर दिए। -जगदीश मेहता, सचिव, बांक पंचायत
शिकायत के बाद सचिव का मेरे पास फोन आया था कि शिकायत हटा लीजिए। मैंने कह दिया कि पानी मिलेगा तो हम खुद शिकायत वापस ले लेंगे। -सलीम खान, शिकायतकर्ता और पूर्व सेना अधिकारी