
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर वर्षों से रह रहे लोगों को अब जमीन का कानूनी मालिकाना हक दिया जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे, ग्राउंड ट्रूथिंग और दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद तैयार किए गए अधिकार अभिलेखों के आधार पर अब जमीन की रजिस्ट्री की जाएगी।
17 सितंबर से रजिस्ट्री का कार्य शुरू होगा। जिले के चयनित 552 गांवों में कुल 1 लाख 34 हजार 556 अधिकार अभिलेख तैयार किए जा रहे है। इनमें निजी के साथ शासकीय आबादी भूमि भी शामिल है। रजिस्ट्री की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए शासन ने तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को उप पंजीयक के अधिकार दिए हैं।
इससे ग्रामीणों को रजिस्ट्री के लिए जिला पंजीयन कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पंजीयन कार्यालयों पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं बढ़ेगा। रजिस्ट्रियां सरकार की ओर से नि:शुल्क की जाएगी और इसके लिए गांवों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे।गौरतलब है कि जिले के 680 गांव हैं, लेकिन स्वामित्व योजना के लिए 552 गांवों का चयन किया गया था। इनमें से 549 गांवों में ड्रोन सर्वे और ग्राउंड ट्रूथिंग पूरी हो चुकी है। तीन गांवों में सर्वे का काम अभी जारी है।
जिले के 541 गांवों में प्रथम, द्वितीय और अंतिम प्रकाशन भी पूरा हो चुका है। इन गांवों में दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद 1 लाख 29 हजार 640 अधिकार अभिलेख वितरित किए जा चुके हैं। शेष 11 गांवों में अलग-अलग स्तर की प्रकिया में कार्य जारी है।भू-अभिलेख प्रभारी अधीक्षक रेशम गवली का कहना है कि अधिकांश गांवों में सर्वे और प्रकाशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।शेष गांवों में भी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
स्वामित्व योजना के तहत सबसे पहले ड्रोन से गांवों और आबादी क्षेत्र में बने भूखंडों का सर्वे कर डिजिटल नक्शे तैयार किए गए। इसके बाद मौके पर जाकर ग्राउंड ट्रूथिंग की गई और भूखंडों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया गया। अगले चरण में नक्शों को अधिकार अभिलेख से जोड़ने के लिए आरओआर टैगिंग की गई।
इसके बाद अधिकार अभिलेख का प्रथम, द्वितीय और अंतिम प्रकाशन कराया गया। इस दौरान ग्रामीणों से दावे और आपत्तियां ली गईं। उनका निराकरण करने के बाद संबंधित भूमि पर निवासरत व्यक्ति के नाम अधिकार अभिलेख तैयार कर अधिकार पत्र दिए गए। अब इसी दस्तावेज के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कर कानूनी हक प्रदान किया जाएगा।
स्वामित्व योजना में सर्वे के दौरान समग्र से संपत्ति धारक का डाटा उठाकर नाम दर्ज हुए है। अधिकांश भू-अभिलेख पत्र पर समग्र में दर्ज नाम आए है, इसलिए कई लोगों के सिर्फ नाम लिखे है, जाति या मध्य नाम दर्ज नहीं है।ऐसे में सही नाम की पहचान चुनौती होगी। कई स्थानों पर अलग-अलग संपत्ति को एक बनाकर दिया गया है, तो कही एक ही सदस्य का नाम दर्ज है, जबकि हिस्सा दो भाईयों का है। रजिस्ट्री के दौरान पूरा नाम नहीं होने से भूमि स्वामी को अपनी पहचान स्थापित करने की चुनौती रहेगी।
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