
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : शनिवार को शहर पर मेघ मेहरबान हुए। दिनभर बादल छाए रहने के बाद शाम के समय सुदामा नगर, बंगाली चौराहा, रीगल, एयरपोर्ट, विजयनगर सहित शहर के कई हिस्सों में कुछ देर के लिए वर्षा हुई।
एयरपोर्ट स्थित वेदर स्टेशन 0.8 मिमी वर्षा दर्ज हुई। विगत वर्षो में अक्टूबर माह में वर्षा की स्थितियां हमेशा दिखाई देती रही है लेकिन इस बार अक्टूबर का पहला पखवाड़ा सूखा ही गया। इस वर्ष अक्टूबर माह में शनिवार को ही शहर में वर्षा हुई। शनिवार को इंदौर के अलावा उज्जैन, धार, शाजापुर और आलीराजपुर में भी हल्की वर्षा हुई।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक एक ऊपरी हवा का चक्रवात दक्षिण पूर्वी राजस्थान व उससे जुड़े दक्षिणी मप्र के ऊपर बना हुआ है। वही एक ऊपरी हवा का चक्रवात उत्तर पश्चिम उत्तर प्रदेश पर बना हुआ है। इसके प्रभाव से ही इंदौर व संभाग के अन्य जिलों में वर्षा हुई। रविवार को इंदौर में बादल छाएंगे और दिन व रात का तापमान सामान्य के आसपास रहेगा। गौरतलब है कि इंदौर में बीते वर्षो में वर्ष 1985 में अक्टूबर माह में सर्वाधिक मासिक वर्षा 230.3 मिमी दर्ज हुई। वही इसी वर्ष 9 अक्टूबर के एक दिन में इंदौर में सर्वाधिक वर्षा 157.4 मिमी दर्ज हुई थी।

शहर में दिन में गर्मी व उमस शहरवासियों को परेशान कर रही है। शनिवार को शहर में बादल छाए और शाम को वर्षा शहर के कुछ हिस्सों में वर्षा हुई। सप्ताह के शुरुआती दिनों में शहर में बादल छाएंगे। सप्ताह के शुरुआती दिनों में रात का तापमान कम होगा और दिन का बढ़ेगा। इसके साथ गर्मी व उमस का असर रहेगा।
दशहरे के बाद शहर में तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी और ठंडक बढ़ेगी। भोपाल स्थित मौसम केंद्र के मौसम विज्ञानियों के मुताबिक वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती हवाओं के रुप में उत्तरी हरियाणा पर बना हुआ है। वही एक ऊपरी हवा का चक्रवात दक्षिण पूर्वी राजस्थान व उससे जुड़े दक्षिणी मप्र के ऊपर बना हुआ है। वही एक ऊपरी हवा का चक्रवात उत्तर पश्चिम उत्तर प्रदेश पर बना हुआ है।
इसके प्रभाव से ही अभी इंदौर के अलावा उज्जैन, ग्वालियर, चंबल व जबलपुर संभाग के जिलों में कही-कहीं वर्षा हुई। हालांकि अगले सप्ताह में मौसम शुष्क रहेगा। बादल न होने से तापमान रात के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी। वर्तमान में इंदौर में हवाओं का पैर्टन सेट नहीं हुआ है। अभी भी हवाएं अलग-अलग रुख से चल रही है। आगामी सप्ताह के अंत तक हवाओं का रुख उत्तरी होने पर ही ठंडक बढ़ने की संभावना है।
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