
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में छह माह के आव्यान की भी मौत हुई है। दस साल की मन्नत के बाद हुआ आव्यान नगर निगम की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। उसकी मां दूध में यह सोचकर पानी मिलाकर उसे पिलाती थी कि पचाने में आसानी रहेगी, लेकिन उसे क्या पता था कि यह पानी ही आव्यान के लिए जहर बन जाएगा। बच्चे की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया।
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय माता-पिता को दो लाख रुपये का चेक देने पहुंचे थे, लेकिन स्वजन ने उन्हें उल्टे पैर लौटा दिया। पिता सुनील साहू ने भरे गले बताया कि हमारी दस वर्षीय बेटी है। बेटे के लिए हमने मन्नतें ली, हर तरह का उपचार कराया। छह माह पहले आव्यान के रूप में बेटी को भाई और हमें बुढ़ापे का सहारा मिला तो लगा जैसे भगवान ने हमारी सुन ली है, लेकिन हमें नहीं पता था कि निगम की लापरवाही हमारे परिवार पर इस तरह कहर बरपाएगी।
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बेटे के जाने के बाद से दस वर्षीय बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार यही पूछ रही है कि पापा मैं अब किसे राखी बांधूंगी। बरगला रहा है शासन सुनील साहू ने शासन द्वारा भेजा गया चेक लौटाने की बात की पुष्टि करते हुए कहा कि लंबे समय से दूषित पानी आ रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। अब सरकार मौत की कीमत लगा रहा है। दो लाख रुपये की राशि देकर मृतकों के स्वजन को बरगलाया जा रहा है।