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आयकर विभाग ने इंदौर में करीब 900 लोगों को आय छुपाने के नोटिस जारी किए, वसूली जाएगी ब्याज और पेनल्टी

इंदौर व आसपास के क्षेत्र में आयकर विभाग ने करीब 900 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। विभाग ने आयकर एक्ट की धारा 148 ए यानी आय छुपाने के मामले में ये नोटिस...और पढ़ें

By Lokesh SolankiEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 12 Apr 2026 09:49:45 PM (IST)Updated Date: Sun, 12 Apr 2026 09:49:45 PM (IST)
आयकर विभाग ने इंदौर में करीब 900 लोगों को आय छुपाने के नोटिस जारी किए, वसूली जाएगी ब्याज और पेनल्टी
आयकर विभाग ने इंदौर में करीब 900 लोगों को आय छुपाने के नोटिस जारी किए

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर व आसपास के क्षेत्र में आयकर विभाग ने करीब 900 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। विभाग ने आयकर एक्ट की धारा 148 ए यानी आय छुपाने के मामले में ये नोटिस दिए हैं। जिन्हें नोटिस जारी किए हैं, उन लोगों ने बीते पांच वर्षों में कोई संपत्ति खरीदी थी। इंस्पेक्टर जनरल आफ रजिस्ट्रेशन एंड स्टाम्प्स (आइजीआरएस) की ओर से आयकर विभाग से संपत्ति रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सूचना साझा की गई थी। उसी आधार पर अब नोटिस जारी किए जा रहे हैं। आयकर विभाग बीते वर्षों में संपत्ति खरीदने वाले लोगों को प्रदेशभर में ऐसे नोटिस दे रहा है।

गाइडलाइन से कम मूल्य पर रजिस्ट्री पड़ रही भारी

इंस्टिट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया (आइसीएआइ) की केंद्रीय परिषद के सदस्य सीए पंकज शाह के अनुसार, आयकर के नोटिस संपत्ति के ऐसे सौदों के मामले में पहुंच रहे हैं जहां संपत्ति का मूल्य 30 लाख रुपये या उससे अधिक है। विभाग ने इनमें से ऐसे प्रकरणों को चिह्नित कर नोटिस जारी किया है जिनमें सरकारी रिकॉर्ड में खरीद के सौदे प्रचलित गाइडलाइन से कम में हुए हैं। आशंका है कि ऐसे प्रकरणों में नकद लेन-देन कर असल सौदे की कीमत छुपाई गई है। आइजीआरएस ने निर्देश जारी कर संबंधित क्षेत्र के डिप्टी रजिस्ट्रारों को अधिकृत किया है कि वे लगातार ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग आयकर विभाग को करें।


जवाब संतोषजनक न होने पर लगेगा भारी जुर्माना

ये वे सभी मामले हो सकते हैं जहां संपत्ति का असल मूल्य छुपाकर पंजीकरण करवाया गया है। अब आयकर विभाग ऐसे सभी लोगों को, जिसमें खरीदार के साथ संपत्ति का विक्रय करने वाले भी शामिल हैं, नोटिस जारी कर दस्तावेज और जवाब मांग रहा है। ऐसे नोटिस मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति को अपने आयकर के रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट व संबंधित संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड के साथ जवाब सौंपना है। आयकर विभाग यदि जवाब से असंतुष्ट होता है और पुष्टि हो जाती है कि असल सौदे का मूल्य शासन से छुपाया गया, तो संबंधित व्यक्ति ने जो रकम कम दिखाई है उसे 'अन्य स्रोतों से अर्जित आय' मानकर आयकर की मांग निकाली जाएगी। असेसमेंट अधिकारी इस पर ब्याज व पेनल्टी जमा करने की मांग भी कर सकता है।

पुराने रिकॉर्ड की भी होगी जांच

संपत्ति के सौदों में मूल्य छुपाने के बाद आयकर की कार्रवाई टैक्स वसूलने से आगे भी बढ़ सकती है। जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में खरीदार से तो स्लैब के अनुसार टैक्स वसूला जाएगा, विक्रेता पर कैपिटल गेन का भार आएगा। बाद में आयकर विभाग संबंधित करदाता के बीते वर्षों के रिटर्न व आय के ब्यौरे की जांच भी कर सकता है। इस सबमें वह अतिरिक्त कार्रवाई के दायरे में भी आ सकता है।

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