Indore Bawdi Case: बावड़ी कांड में प्रस्तुत होना थी मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट, सुनवाई का नंबर ही नहीं आया
Indore Bawdi Case: 31 मार्च 2023 को स्नेह नगर बावड़ी कांड में 36 लोगों की मौत हो गई थी। ये लोग रामनवमी के अवसर पर बेलेश्वर महादेव मंदिर में हवन के लिए ...और पढ़ें
By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Thu, 04 Jan 2024 03:24:14 PM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jan 2024 03:24:14 PM (IST)
बावड़ी कांड में प्रस्तुत होना थी मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट, सुनवाई का नंबर ही नहीं आया Indore Bawdi Case: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। 31 मार्च 2023 को इंदौर के स्नेह नगर क्षेत्र में हुए बावड़ी कांड को लेकर बुधवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होना थी, लेकिन सुनवाई का नंबर आने से पहले ही कोर्ट का समय समाप्त हो गया। बुधवार को शासन को मामले में हुई मजिस्ट्रिल जांच की रिपोर्ट प्रस्तुत करना थी। कोर्ट अब इस मामले में पांच जनवरी को सुनवाई करेगी। संभवत: इसके पहले शासन मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर देगा।
गौरतलब है कि 31 मार्च 2023 को
स्नेह नगर बावड़ी कांड में 36 लोगों की मौत हो गई थी। ये लोग रामनवमी के अवसर पर बेलेश्वर महादेव मंदिर में हवन के लिए जमा हुए थे। जिस जगह बैठकर वे हवन कर रहे थे वहां नीचे बावड़ी थी। हवन कर रहे लोगों को इस बात का आभास भी नहीं था कि जिस जगह बैठकर वे हवन कर रहे हैं वहां नीचे कोई बावड़ी भी है।
हवन के दौरान बावड़ी के ऊपर डली स्लैब अचानक धंसी और हवन कर रहे लोग 80 फीट गहरी बावड़ी में गिर गए। घंटों चले रेस्क्यू आपरेशन के बाद भी 36 लोगों की मौत हो गई। इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। इनमें मामले की
सीबीआइ जांच से लेकर मृतकों के स्वजन को पर्याप्त मुआवजा देने तक की मांग की गई है। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने शासन से इस मामले में करवाई गई मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
बेलेश्वर महादेव मंदिर को जमींदोज कर बंद कर दी थी बावड़ी
घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने नगर निगम की मदद से बेलेश्वर महादेव मंदिर को जमींदोज कर उसके मलबे से बावड़ी को बंद करवा दिया था। स्थानीय रहवासियों ने इसका विरोध भी किया था। उनका कहना था कि मंदिर उनकी आस्था का केंद्र है। उसे जमींदोज नहीं किया जाना था। रहवासियों के विरोध के बाद इस मंदिर को दोबारा बनाए जाने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।