
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की घटना के बाद अब प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से विशेषज्ञों की टीम इंदौर पहुंच चुकी है और पूरे क्षेत्र में भ्रमण कर रही है। कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलॉजी से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष और डॉ. गौतम चौधरी दूषित जल के रैंडम सेम्पल इकट्ठा कर उनका वैज्ञानिक परीक्षण करेंगे।
इस कार्य में नगर निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर कार्य किया जा रहा है। टीम अस्पतालों में जाकर मरीजों से भी चर्चा कर रही है और यह देखा जा रहा है कि उल्टी-दस्त के क्या लक्षण मरीजों में दिखाई दे रहे हैं, दवाओं का कितना असर हो रहा है, मरीज कितने दिन में ठीक हो रहे हैं। रविवार को टीम एमवायएच और चाचा नेहरू अस्पताल पहुंची और वहां भर्ती मरीजों के इलाज की जानकारी ली।
भागीरथपुरा क्षेत्र में स्टेट सर्विलांस और विशेषज्ञों की टीम द्वारा माइक्रो लेवल पर निगरानी का कार्य किया जा रहा है। सामुदायिक स्तर पर भी स्थानीय नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने रविवार को इस संबंध में कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से आई टीम के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि पूरे भागीरथपुरा क्षेत्र को 30 से अधिक झोन में बांटा गया है। हर झोन में कर्मचारियों और नागरिकों के साथ मिलकर क्लोरिनेशन का कार्य किया जाएगा।
इसके लिए पूरे क्षेत्र में लोगों को जागरूक किया जा रहा है और पानी की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। क्षेत्र में स्थित सभी बोरिंग का क्लोरिनेशन किया जाएगा। इसके साथ ही घरों के बेसमेंट में बने होज की सफाई कर उनका क्लोरिनेशन किया जाएगा। इसके बाद ही क्षेत्र के नागरिक बोरिंग के पानी का उपयोग करेंगे। कलेक्टर ने कहा कि जीबीएस (गुइलेन-बैरे सिंड्रोम) बीमारी का कोई भी मरीज नहीं पाया गया। जहां पर दूषित पानी पाया जाएगा, उसे चिन्हित कर उचित प्रबंध किया जाएगा।
बैठक में अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार, स्टेट सर्विलांस टीम के डॉ. अश्विन भागवत समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे। कलेक्टर शिवम वर्मा और नवागत नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने रविवार सुबह भागीरथपुरा क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि भागीरथपुरा क्षेत्र के नागरिकों को शुद्ध जल उपलब्ध हो। प्रशासन विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर लगातार कार्य कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि टैंकरों से यहां शुद्ध पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं आ रहा है।
कलेक्टर वर्मा ने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से प्रभावित नागरिकों के उपचार के लिए प्रशासन तीन स्तर पर कार्य कर रहा है। जलजनित बीमारियों से प्रभावित व्यक्तियों को अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है। भर्ती मरीजों की पूरी निगरानी की जा रही है। जो मरीज डिस्चार्ज होकर घर लौट चुके हैं, उनके स्वास्थ्य की जानकारी भी प्राप्त की जा रही है।
नगर निगम का अमला लगातार क्षेत्र में सर्वे कर रहा है और भागीरथपुरा क्षेत्र में रिंग सर्वे भी किया जा रहा है। लीकेज और रिसाव ढूंढने का काम चल रहा है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जल स्रोत पूरी तरह सुरक्षित हों और नागरिकों को दूषित पानी से सुरक्षा मिल सके।
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