
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो में आने वाले वार्ड क्रमांक 23 के हालात भी दूषित जल प्रदाय में भागीरथपुरा जैसे ही हैं। यहाँ भी कई कॉलोनियों में सीवरेज का पानी पेयजल में मिल रहा है। उल्टी, दस्त जैसी समस्या आम है। यहाँ के रहवासियों के लिए गर्मी हो या अन्य मौसम, साफ पानी मिलना बड़ी समस्या है। एक दिन छोड़कर जल प्रदाय होता है और वह भी गंदा पानी आता है। इसके लिए दर्जनभर बार जनप्रतिनिधियों और निगम के अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी समस्या हल नहीं हो रही है। यहाँ बोरिंग के पानी और नर्मदा लाइन में भी ड्रेनेज का पानी मिल रहा है, जिसके कारण लोग बीमार पड़ते रहते हैं। सीवरेज का पानी सड़क पर बह रहा है, लेकिन इस समस्या को हल करने वाला कोई नहीं है।
इस वार्ड में आने वाली क्लर्क कॉलोनी, श्यामनगर और कुछ प्रमुख कॉलोनियों की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है, लेकिन जैसे ही भीतरी इलाकों में प्रवेश करते हैं, वहाँ की हकीकत सामने आ जाती है। कई गलियों में कचरे के ढेर लगे हैं। दुकानों के सामने अतिक्रमण होने से वाहन चालकों को निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में गलियों में पानी भर जाता है, जिससे रहवासी और दुकानदार दोनों परेशान रहते हैं। वार्ड में वर्षों से ड्रेनेज की गंभीर समस्या बनी हुई है। कुछ क्षेत्रों में पाइपलाइन डाली जा रही है, लेकिन रहवासियों का कहना है कि आए दिन ड्रेनेज चोक हो जाती है, जिसके कारण घरों की बोरिंग से भी गंदा पानी आने लगता है।
इस मुद्दे को हर चुनाव में जनप्रतिनिधियों के सामने रखा जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्या जस की तस बनी रहती है। इसके साथ ही साफ पीने के पानी की समस्या भी विकराल रूप ले चुकी है। पुराने बोरिंग बंद हो चुके हैं और नर्मदा जल एक दिन छोड़कर, वह भी कुछ समय के लिए ही उपलब्ध हो पाता है। हालांकि नए ड्रेनेज के पाइप डालने का काम किया जा रहा है। बैरवा समाज उद्यान के आसपास भी कचरा पसरा हुआ है। स्वच्छता के नाम पर हर महीने कचरे का बिल लिया जा रहा है, लेकिन नियमित कचरा संग्रह नहीं हो रहा। सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से कई दुकानदार और रहवासी बैकलेन को ही गंदा कर रहे हैं। सड़कों पर गड्ढे हैं, बारिश में कीचड़ और गंदा पानी दुकानों व घरों तक पहुंच जाता है। वार्ड में सरकारी अस्पताल और खेल के मैदान की कमी खलती है। रहवासी अतिक्रमण हटाने और सड़कें चौड़ी करने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं।
वार्ड क्रमांक 23 में लगभग 24 हजार मतदाता हैं, जिनमें 11,500 महिला मतदाता शामिल हैं। जनसंख्या के लिहाज से यह वार्ड मध्यम आकार का है और इसमें कई कॉलोनियां और बस्तियां आती हैं। पहले जहां वार्ड में 27 मतदान केंद्र थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। क्षेत्र का स्वरूप मिश्रित है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत रहवासी और 30 प्रतिशत व्यावसायिक क्षेत्र शामिल है। यहाँ दुकानों, होटलों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं। धार्मिक दृष्टि से यह वार्ड समृद्ध है; यहाँ कनकेश्वरी माता मंदिर, तीन जैन मंदिर, 60 वर्ष से अधिक पुराना राम मंदिर तथा राधा-कृष्ण मंदिर स्थित हैं।
वार्ड में शिक्षा के लिए दो सरकारी स्कूल हैं। वार्ड में परदेशीपुरा, अर्जुनसिंह गौहर नगर, लालगली, गणेश नगर, क्लर्क कॉलोनी, धनलक्ष्मी अपार्टमेंट, रेडीमेड कॉम्प्लेक्स, इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स, समाज कल्याण परिसर, भगवती नगर, यशोदा नगर, पुराना गौरीनगर, कोली मोहल्ला और आदर्श बिजासन नगर सहित अन्य कॉलोनियां शामिल हैं। क्षेत्र में एक पानी की टंकी है, लेकिन खेल मैदान और सरकारी अस्पताल का अभाव है, जिसकी कमी रहवासी लंबे समय से महसूस कर रहे हैं। परदेशीपुरा मुख्य सड़क पर शराब दुकान के आसपास वाहनों की भीड़ के कारण अक्सर यातायात बाधित होता है।
यहां की सबसे बड़ी समस्या साफ पीने लायक पानी है। हमें साफ पानी मिल जाए तो यह हम पर उपकार होगा। पीने के लिए पानी को छानना पड़ता है, फिटकरी डालनी पड़ती है, फिर भी डर बना रहता है कि कहीं बीमार न पड़ जाएं। अब तो बोल-बोल कर भी थक गए हैं। (हर्षिता जाजोदिया, रहवासी) एक दिन छोड़कर पानी आता है, हमारा यहाँ सुबह सात बजे जल प्रदाय होता है। कभी आकर देखो उसमें से क्या कीड़े निकलते हैं। लोगों को बुखार और उल्टी होती है। उपचार के लिए भी दूसरे वार्ड में जाना पड़ता है। (रमेश दोहरे, रहवासी) यहाँ कचरा गाड़ी आती है, साफ-सफाई भी हो रही है, लेकिन इससे बड़ी समस्या पानी की है। पानी उबालकर पीना पड़ता है। जनप्रतिनिधि से भी कई बार बोल चुके हैं। नगर-निगम के अधिकारी आकर आश्वासन देकर चले जाते हैं। (रामलाल मेहता, रहवासी)
आपके सामने देखो यह ड्रेनेज का पानी पीने के पानी में मिल रहा है। यह आपकी आंखों देखी है। बताओ क्या करें, हमारे बच्चे बीमार पड़ते हैं। बुजुर्गों को ठंड-बुखार आता है। प्राइवेट अस्पताल में उपचार के लिए जाना पड़ता है। (मंगूबाई बरवा, रहवासी) सीवरेज का पानी सड़क पर बह रहा है। इससे कीचड़ हो रहा है। मच्छर गंदगी पर भिनभिनाते रहते हैं। इन समस्याओं का समाधान हो जाए यह निवेदन अधिकारियों से कर रहे हैं। कब सुनवाई होगी यह वही जानते हैं। (कौशल्याबाई सिसोदिया, रहवासी) वार्ड में पानी सबसे बड़ी समस्या है। इसके अतिरिक्त साफ-सफाई की व्यवस्था पर थोड़ा ध्यान देना चाहिए। उपचार के लिए सरकारी व्यवस्था भी होनी चाहिए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर अपना उपचार करा सकें। (रणजीत सिंह, रहवासी) दो साल हो गए यह गंदे पानी की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। वर्षा के दिनों में सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी भर जाता है, जिससे बाहर निकलने में परेशानी होती है। सकरी गलियों में पर्याप्त सफाई का प्रबंध भी करना चाहिए। (भगवती प्रसाद लोधवाल, रहवासी) हमारे यहाँ सबसे बड़ी समस्या ड्रेनेज लाइन की है। ड्रेनेज चोक होती रहती है। सड़क पर भी कई जगह कचरे का ढेर लगा रहता है। गंदा पानी हमारे बोरिंग में चला जाता है। शिकायत करने के बाद भी कई दिनों तक कोई नहीं आता है। (अनिता सिहगुना, रहवासी)
गंदे पानी की समस्या वार्डभर में है। ढाई साल से नई लाइन डालने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा हुआ है, लेकिन अब तक मंजूर नहीं हुआ है। यहां जो लाइन डली हुई है वह 52 साल पुरानी है। कहते हैं अमृत-2 में भी काम होंगे, लेकिन अभी तक तो इसके टेंडर ही नहीं हुए। संजीवनी क्लीनिक का काम भी अंतिम चरण में है। (विनीता धर्मेंद्र मौर्य, पार्षद) शहरभर में दूषित पेयजल की समस्या है। इसमें वार्ड 23 भी शामिल है। यहां भी लोग लंबे समय से दूषित जल पीने को मजबूर हैं। इनकी समस्याओं को दूर करने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। भीतरी कॉलोनियों में स्थिति और ज्यादा खराब है। (चिंटू चौकसे, नेता प्रतिपक्ष) कुछ क्षेत्र में शुद्ध जल को लेकर समस्या है। शिकायत मिलने पर ड्रेनेज चोक होने की समस्या को दूर किया जाता है। साथ ही कचरा गाड़ियाँ भी क्षेत्र में नियमित कचरा उठाने के लिए आती हैं। साफ-सफाई को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम का अमला समय-समय पर पहुंचता है। (आशीष राठौर, जोनल अधिकारी)