
प्रणय चौहान, नईदुनिया, इंदौर। इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से टिही की 2.95 किमी लंबी टनल में काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। टिही से पीथमपुर की ओर सुरंग के भीतर बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो गया है। इसमें पटरियों के नीचे सामान्य ट्रैक की तरह गिट्टी नहीं होगी, बल्कि मजबूत कंक्रीट आधार पर ट्रैक बिछाया जाएगा।
साथ ही पहियों की सुरक्षा के लिए ड्रीलमेन गार्ड, हवा के प्रवाह के लिए एग्जास्ट फैन और निगरानी के लिए सीसीटीवी लगाए जा रहे हैं। रेलवे ने अक्टूबर 2026 तक टनल का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, वर्तमान स्थिति में काम दिसंबर से पहले पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
2957 मीटर लंबी टनल में लाइनिंग का काम चल रहा है। खुदाई के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। टनल के जिन हिस्सों में निर्माण पूरा हो रहा है, उन्हें ट्रैक बिछाने के लिए सौंपा जा रहा है। शेष हिस्सों में फिनिशिंग का काम जारी है। लाइनिंग से सुरंग की अंदरूनी सतह मजबूत होगी और चट्टानों व मिट्टी के दबाव से संरचना को सुरक्षा मिलेगी।
बैलास्टलेस ट्रैक आधुनिक रेलवे ट्रैक तकनीक है। सामान्य रेल पटरी के नीचे पत्थर की गिट्टी बिछाई जाती है, जबकि इसमें गिट्टी के स्थान पर मजबूत कंक्रीट आधार तैयार कर उस पर पटरियां लगाई जाती हैं। टनल के भीतर गिट्टी के खिसकने या उसके रखरखाव की समस्या कम होगी। ट्रैक को स्थिर रखने और लंबे समय तक सुरक्षित संचालन में भी यह तकनीक मदद करेगी।
टनल में पटरियों के बीच करीब 12 मिमी नीचे ड्रीलमेन गार्ड लगाया जा रहा है। इसका उद्देश्य पहिए में खराबी या क्षति होने की स्थिति में उसे अनियंत्रित रूप से घूमने अथवा किनारे की ओर खिसकने से रोकना है। इससे ट्रेन की स्थिरता बनाए रखने और पहिए को टनल की दीवार से टकराने से रोकने में मदद मिलेगी।
टनल में कुल 12 एग्जास्ट फैन लगाए जा रहे हैं। इनमें चार स्थापित किए जा चुके हैं। प्रत्येक फैन की क्षमता 37.5 किलोवाट है। ये सुरंग के भीतर की प्रदूषित हवा और धुआं बाहर निकालने तथा ताजी हवा अंदर पहुंचाने में मदद करेंगे। फैन को विद्युत आपूर्ति के लिए टनल के ऊपर सब स्टेशन बनाए जा रहे हैं और केबल के माध्यम से इन्हें जोड़ा जाएगा।
विद्युतीकरण के लिए टनल के ऊपरी हिस्से में हर 31.5 मीटर पर कैंटिलीवर लगाए जा रहे हैं। इनके माध्यम से आगे ओवरहेड इक्विपमेंट लगाया जाएगा, जिससे ट्रेन को विद्युत आपूर्ति मिलेगी। टनल की दोनों दीवारों पर ट्रैक के ऊपर हर आठ मीटर पर लाइट लगाने की योजना है।
हर 50 मीटर पर पानी की निकासी
टनल में हर 50 मीटर पर ड्रेनेज चैंबर बनाए गए हैं। दोनों ओर साइड ड्रेन और इनवर्ट ड्रेन का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। इनका उद्देश्य बारिश या जमीन से आने वाले पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालना है। कट एंड कवर सेक्शन में ओवरट रिइनफोर्समेंट और लाइनिंग का काम भी पूरा हो चुका है।
सुरंग को केवल ट्रेन संचालन के लिए नहीं, बल्कि आपात परिस्थितियों को ध्यान में रखकर भी तैयार किया जा रहा है। इसमें रिफ्यूज निच, रेस्क्यू शाफ्ट और वेंटिलेशन डक्ट बनाए जा रहे हैं। आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थान देने और बचाव दल को अंदर पहुंचाने में इनका उपयोग होगा।
रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों के अनुसार टनल का काम अक्टूबर तक पूरा करने के लिए प्रतिदिन की कार्ययोजना बनाई गई है। परियोजना में टनल निर्माण के कारण पहले ही देरी हो चुकी है, इसलिए अब प्रत्येक हिस्से के काम की समय-सीमा तय कर काउंटडाउन के साथ काम किया जा रहा है। पूरी टनल में सुरक्षा निगरानी के लिए 150 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
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