• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

इंदौर-दाहोद रेल परियोजना : टिही से पीथमपुर की सुरंग में बिना गिट्टी की पटरियां, पहियों की सुरक्षा के लिए ड्रिलमैन गार्ड

Indore Dahod Rail Line Project: इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से टिही की 2.95 किमी लंबी टनल में ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो गया है।

By Pranay ChouhanEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 20 Aug 2026 09:07:20 AM (IST)Updated Date: Thu, 20 Aug 2026 09:21:47 AM (IST)
इंदौर-दाहोद रेल परियोजना : टिही से पीथमपुर की सुरंग में बिना गिट्टी की पटरियां, पहियों की सुरक्षा के लिए ड्रिलमैन गार्ड
टनल के अंदर टीही से पीथमपुर की तरफ ड्रीलमेन गार्ड के साथ बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने का काम तेजी से किया जा रहा।

HighLights

  1. 2.95 किमी लंबी टनल में बैलास्टलेस ट्रैक का काम तेज
  2. 12 एग्जास्ट फैन से हवा का प्रवाह, 150 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
  3. टनल के अंदर विद्युतीकरण की तैयारी भी साथ-साथ जारी

प्रणय चौहान, नईदुनिया, इंदौर। इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से टिही की 2.95 किमी लंबी टनल में काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। टिही से पीथमपुर की ओर सुरंग के भीतर बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो गया है। इसमें पटरियों के नीचे सामान्य ट्रैक की तरह गिट्टी नहीं होगी, बल्कि मजबूत कंक्रीट आधार पर ट्रैक बिछाया जाएगा।

साथ ही पहियों की सुरक्षा के लिए ड्रीलमेन गार्ड, हवा के प्रवाह के लिए एग्जास्ट फैन और निगरानी के लिए सीसीटीवी लगाए जा रहे हैं। रेलवे ने अक्टूबर 2026 तक टनल का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, वर्तमान स्थिति में काम दिसंबर से पहले पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।


naidunia_image

लाइनिंग से मजबूत होगी सुरंग

2957 मीटर लंबी टनल में लाइनिंग का काम चल रहा है। खुदाई के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। टनल के जिन हिस्सों में निर्माण पूरा हो रहा है, उन्हें ट्रैक बिछाने के लिए सौंपा जा रहा है। शेष हिस्सों में फिनिशिंग का काम जारी है। लाइनिंग से सुरंग की अंदरूनी सतह मजबूत होगी और चट्टानों व मिट्टी के दबाव से संरचना को सुरक्षा मिलेगी।

गिट्टी की जगह कंक्रीट का आधार

बैलास्टलेस ट्रैक आधुनिक रेलवे ट्रैक तकनीक है। सामान्य रेल पटरी के नीचे पत्थर की गिट्टी बिछाई जाती है, जबकि इसमें गिट्टी के स्थान पर मजबूत कंक्रीट आधार तैयार कर उस पर पटरियां लगाई जाती हैं। टनल के भीतर गिट्टी के खिसकने या उसके रखरखाव की समस्या कम होगी। ट्रैक को स्थिर रखने और लंबे समय तक सुरक्षित संचालन में भी यह तकनीक मदद करेगी।

naidunia_image

पहियों की सुरक्षा करेगा ड्रीलमेन गार्ड

टनल में पटरियों के बीच करीब 12 मिमी नीचे ड्रीलमेन गार्ड लगाया जा रहा है। इसका उद्देश्य पहिए में खराबी या क्षति होने की स्थिति में उसे अनियंत्रित रूप से घूमने अथवा किनारे की ओर खिसकने से रोकना है। इससे ट्रेन की स्थिरता बनाए रखने और पहिए को टनल की दीवार से टकराने से रोकने में मदद मिलेगी।

12 फैन निकालेंगे प्रदूषित हवा

टनल में कुल 12 एग्जास्ट फैन लगाए जा रहे हैं। इनमें चार स्थापित किए जा चुके हैं। प्रत्येक फैन की क्षमता 37.5 किलोवाट है। ये सुरंग के भीतर की प्रदूषित हवा और धुआं बाहर निकालने तथा ताजी हवा अंदर पहुंचाने में मदद करेंगे। फैन को विद्युत आपूर्ति के लिए टनल के ऊपर सब स्टेशन बनाए जा रहे हैं और केबल के माध्यम से इन्हें जोड़ा जाएगा।

31.5 मीटर पर कैंटिलीवर

विद्युतीकरण के लिए टनल के ऊपरी हिस्से में हर 31.5 मीटर पर कैंटिलीवर लगाए जा रहे हैं। इनके माध्यम से आगे ओवरहेड इक्विपमेंट लगाया जाएगा, जिससे ट्रेन को विद्युत आपूर्ति मिलेगी। टनल की दोनों दीवारों पर ट्रैक के ऊपर हर आठ मीटर पर लाइट लगाने की योजना है।

हर 50 मीटर पर पानी की निकासी

टनल में हर 50 मीटर पर ड्रेनेज चैंबर बनाए गए हैं। दोनों ओर साइड ड्रेन और इनवर्ट ड्रेन का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। इनका उद्देश्य बारिश या जमीन से आने वाले पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालना है। कट एंड कवर सेक्शन में ओवरट रिइनफोर्समेंट और लाइनिंग का काम भी पूरा हो चुका है।

आपात स्थिति में बचाव की व्यवस्था

सुरंग को केवल ट्रेन संचालन के लिए नहीं, बल्कि आपात परिस्थितियों को ध्यान में रखकर भी तैयार किया जा रहा है। इसमें रिफ्यूज निच, रेस्क्यू शाफ्ट और वेंटिलेशन डक्ट बनाए जा रहे हैं। आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थान देने और बचाव दल को अंदर पहुंचाने में इनका उपयोग होगा।

हर दिन का लक्ष्य, काउंटडाउन शुरू

रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों के अनुसार टनल का काम अक्टूबर तक पूरा करने के लिए प्रतिदिन की कार्ययोजना बनाई गई है। परियोजना में टनल निर्माण के कारण पहले ही देरी हो चुकी है, इसलिए अब प्रत्येक हिस्से के काम की समय-सीमा तय कर काउंटडाउन के साथ काम किया जा रहा है। पूरी टनल में सुरक्षा निगरानी के लिए 150 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

इंदौर-दाहोद रेल परियोजना

  • 2008 परियोजना को मिली स्वीकृति
  • 200.97 किमी इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन की कुल लंबाई
  • 1700 करोड़ रुपये वर्तमान परियोजना लागत
  • 31.5 मीटर दो कैंटिलीवर के बीच की दूरी
  • 50 मीटर हर ड्रेनेज चैंबर के बीच की दूरी
  • 8 मीटर टनल में प्रस्तावित लाइटों के बीच की दूरी
  • 37.5 किलोवाट प्रत्येक एग्जास्ट फैन की क्षमता

यह भी पढ़ें- इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन : टनल लाइनिंग का काम पूरा, बैलास्टलेस ट्रैक का काम तेज