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इंदौर एलिवेटेड कॉरिडोर मामला: हाई कोर्ट में वीडियो प्रजेंटेशन नहीं दे सका शासन, सुनवाई 7 अक्टूबर तक टली

Indore Elevated Corridor: शासकीय अधिवक्ता ने इसके लिए समय ले लिया। कोर्ट ने अनुमति देते हुए सुनवाई सात अक्टूबर तक बढ़ा दी।

By Kuldeep BhawsarEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 06:23:16 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 06:23:16 PM (IST)
इंदौर एलिवेटेड कॉरिडोर मामला: हाई कोर्ट में वीडियो प्रजेंटेशन नहीं दे सका शासन, सुनवाई 7 अक्टूबर तक टली
हाई कोर्ट में जीएडी और इस्टीमेट के लिए मांगा समय।

HighLights

  1. बिना तकनीकी सर्वे करोड़ों रुपये खर्च करने का आरोप
  2. हाई कोर्ट में जीएडी और इस्टीमेट के लिए मांगा समय
  3. याचिका पर हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शासन को सोमवार को हाई कोर्ट में वीडियो प्रजेंटेशन के जरिए बताना था कि एलआईजी चौराहा से नवलखा चौराहा तक बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर से शहर का बदहाल यातायात नियमित कैसे होगा और इसके माध्यम से यातायात की समस्या का समाधान कैसे निकलेगा, लेकिन वह वीडियो प्रजेंटेशन ही नहीं दे सकी। शासकीय अधिवक्ता ने इसके लिए समय ले लिया। कोर्ट ने अनुमति देते हुए सुनवाई सात अक्टूबर तक बढ़ा दी।

बिना तकनीकी सर्वे एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का आरोप

हाई कोर्ट में चल रही यह जनहित याचिका इंजीनियर अतुल शेठ ने दायर की है। इसमें उन्होंने कहा है कि बीआरटीएस कॉरिडोर के स्थान पर पीडब्ल्यूडी द्वारा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है, लेकिन इसके लिए कोई तकनीकी सर्वे नहीं किया गया। किसी को नहीं पता कि एलिवेटेड कॉरिडोर की कितनी उपयोगिता है।


चूंकि सर्वे नहीं हुआ इसलिए इससे जुड़े कोई आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं। याचिका में यह आरोप भी हैं कि जनता के करोड़ों रुपये खर्च करने के लिए परियोजना तैयार की गई है। इस कॉरिडोर के बनने के बाद भी यह बहुत ज्यादा उपयोगी साबित नहीं होगा।

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जीएडी और प्रोजेक्ट इस्टीमेट पेश करने के लिए मांगा समय

पिछली सुनवाई पर शासन की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने कहा था कि वे इंदौर में प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के बारे में वीडियो प्रजेंटेशन के जरिए कोर्ट को बताना चाहते हैं कि कैसे इससे शहर के यातायात की समस्या का समाधान निकलेगा।

याचिकाकर्ता शेठ ने बताया कि सोमवार को शासन को वीडियो प्रजेंटेशन के साथ-साथ जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) और इस प्रोजेक्ट का इस्टीमेट कोर्ट में प्रस्तुत करना था, लेकिन शासन के वकील ने तीनों के लिए समय ले लिया।