
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर में यातायात का दबाव कम करने और अंतरराज्यीय बस सेवाओं को व्यवस्थित करने के लिए करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया कुमेड़ी आईएसबीटी (ISBT) यानी अंतरराज्यीय बस टर्मिनल करीब दो साल बाद भी यात्रियों के इंतजार में है। एमआर-10 पर एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित वातानुकूलित टर्मिनल तैयार है, सुविधाएं मौजूद हैं और संचालन के लिए एजेंसी भी तय हो चुकी है।
बस संचालकों के साथ दो बार बैठक हो चुकी है, लेकिन संचालन पर अंतिम निर्णय नहीं होने से प्रक्रिया अटकी हुई है। जिम्मेदारों द्वारा निर्णय नहीं लिए जाने से करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार की गई सुविधा यात्रियों के उपयोग में नहीं आ पा रही है।
एजेंसी की वजह से लटका संचालन
इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा कुमेड़ी में करीब 21 एकड़ क्षेत्र में आईएसबीटी (ISBT) विकसित किया गया है। लंबे समय तक संचालन एजेंसी नहीं मिलने से प्रक्रिया लटकी रही। पांच बार टेंडर प्रक्रिया के बाद पुणे की बीवीजी (BVG) कंपनी को संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई। करीब तीन महीने पहले एजेंसी तय होने के बावजूद संचालन शुरू नहीं हो सका।
बीते माह कलेक्टर शिवम वर्मा और आइडीए सीईओ परीक्षित झाड़े ने आईएसबीटी (ISBT) का दौरा किया था। इस दौरान सीईओ (CEO) झाड़े ने कहा था कि संचालन शुरू करने की कवायद चल रही है और जल्द ही संचालन शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, संचालन एजेंसी बीवीजी (BVG) ने आईडीए के साथ संचालन को लेकर एग्रीमेंट कर लिया है और अब आईएसबीटी में व्यवस्थाएं जुटाने का कार्य कर रही है।
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यात्रियों को मिलेंगी कई सुविधाएं
आईएसबीटी में यात्रियों के लिए वातानुकूलित प्रतीक्षालय,32 बोर्डिंग-डिबोर्डिंग-बे और 14 एसी टिकट काउंटर बनाए गए हैं। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए बड़ी पार्किंग के साथ ऑटो और ई-रिक्शा के लिए भी व्यवस्था की गई है। बस संचालन शुरू होने पर यात्रियों को एक ही परिसर में टिकट, प्रतीक्षा और पार्किंग जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।
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रोज 1440 बसें चलाने की क्षमता
आईएसबीटी (ISBT) से प्रतिदिन करीब 1440 बसों के संचालन की क्षमता रखी गई है। राजस्थान,गुजरात और दिल्ली के लंबे रूटों की बसों को यहां स्थानांतरित करने की योजना है। वहीं उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा आदि शहरों के लिए सरवटे से संचालित बसें भी आईएसबीटी होते हुए चल सकेंगी। सिंहस्थ-2028 के दौरान इसकी उपयोगिता और बढ़ जाएगी और यह श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब बन सकता है।