
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर नगर निगम द्वारा बिल्डिंग के आसपास खाली छोड़ी गई जमीन (एमओएस) पर लगाए गए टैक्स के विरोध में हाई कोर्ट में प्रस्तुत जनहित याचिका में मंगलवार को सुनवाई होना थी, लेकिन कोर्ट का समय समाप्त होने से टल गई। अब कोर्ट इस मामले में 17 नवंबर को सुनवाई करेगी।
हाई कोर्ट में चल रही इस जनहित याचिका में कहा है कि मकान बनाते वक्त लोग भूखंड का कुछ भाग खाली छोड़ते हैं ताकि मकान में ताजी हवा, धूप आ सके। इसे एमओएस (मार्जिनल ओपन स्पेस) कहा जाता है। भवन निर्माण के नियमों में भी एमओएस छोड़ना अनिवार्य है।
अब तक नगर निगम भवन पर तो टैक्स लेता था लेकिन एमओएस को टैक्स से छूट थी, लेकिन अब निगम ने एमओएस को टैक्स के दायरे में ले लिया है। इसका सीधा असर आम नागरिक की जेब पर पड़ रहा है। उन्हें 500 रुपये से लेकर चार हजार रुपये वार्षिक अतिरिक्त देना पड़ रहे हैं।
नगर निगम पिछले वर्ष ही कालोनी के रेट जोन में बदलाव कर नागरिकों की जेब को फटका लगा चुकी है। अब एक अतिरिक्त बोझ नागरिकों पर डाला जा रहा है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव खुद एमओएस टैक्स को वापस लिए जाने का समर्थन कर चुके हैं। याचिका में निगम का जवाब आ चुका है। निगम का कहना है कि एमओएस टैक्स की वसूली प्रविधानों के अंतर्गत की जा रही है। इसमें कुछ भी अनियमित नहीं है।
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